राजेंद्र नाथ : बॉलीवुड का ऑफिसियल पोपटलाल

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70-80 के दशक में हास्य कलाकारों के लिए अपने हाव-भाव से हास्य पैदा करने की चुनौती हुआ करती थी. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महमूद, जॉनी वकार और केश्टो मुखर्जी जैसे कलाकारों प्रसिद्धि के शिखर को छुआ था. बाद में आनेवाले कलाकार भी इसी परंपरा को अपनाते हुए फिल्मों में कॉमेडी की धारा को आगे बढ़ा रहे थे. लेकिन फिल्म ‘हम सब चोर हैं’ से जब राजेंद्र नाथ की एंट्री बॉलीवुड में हुई तो उन्होंने कॉमेडी को एक नयी दिशा दे दी जहां हाव-भाव कम और संक्षित्त, चुस्त और चुटीले संवादों का ज्यादा जोर था. राजेंद्र नाथ ने अपनी नयी कॉमिक शैली के तहत बॉडी लैंग्वेज की जगह चेहरे के एक्सप्रेशन को ज्यादा तरजीह दी, जो आगे चलकर हास्य कलाकारों के लिए प्रेरणा बन गयी.

साल 1931 में पाकिस्तान के पेशावर में जन्मे राजेंद्र नाथ का परिवार भारत आ गया. बड़े भाई प्रेमनाथ के नक़्शे-कदम पर चलते हुए राजेंद्र नाथ भी फिल्मों में काम करने के इरादे से मुंबई आ गए, लेकिन यहां उन्हें कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा. लेकिन बाद में जब उनकी बहन कृष्णा की शादी राज कपूर से हुई तब उनकी मुश्किलें थोड़ी कम होने लगी. आय.एस.जौहर ने राजेंद्र नाथ को ‘हम सब चोर हैं’ के जरिए पहला ब्रेक दिया. फिल्म को अच्छी सफलता मिली और उनकी पहचान बनी. सही मायने में राजेंद्र नाथ की कामयाबी का सफर निर्माता-निर्देशक नासिर हुसैन के साथ शुरू हुआ. नासिर हुसैन द्वारा निर्देशित ‘दिल देके देखो’ राजेंद्र नाथ की पहली बड़ी सफलता थी. इस फिल्म की कामयाबी के बाद राजेंद्र नाथ की संघर्ष की राह आसान होती चली गई.

देव आनंद और आशा पारेख की फिल्म ‘जब प्यार किसी से होता है’ में राजेंद्र नाथ को पोपटलाल का किरदार निभाने को मिला. इस पोपटलाल के किरदार के रूप में उन्हें अपार लोकप्रियता मिली और वे दर्शकों के बीच इसी नाम से लोकप्रिय हो गए. आंखों पर बड़ा और मोटा चश्मा..सिर पर टोपी..मोजे और बड़े-बड़े जूतों में राजेंद्र नाथ कई फिल्मों में नजर आएं. उनका यह गेटअप बेहद लोकप्रिय हुआ. उनका किरदार अक्सर मूर्ख आदमी का हुआ करता था. वे एक ऐसे मूर्ख व्यक्ति बनते जो उलटी-सीधी हरकत किया करता, लेकिन उनकी ये हरकतें दर्शकों के मन को बेहद भाती थी. उनका किरदार हमेशा हीरो का साथ देता और खलनायक से लड़ाई मोल लेता.. वे इस इमेज में बंध गए और अधिकांश फिल्मों में इसी किरदार को दोहराते हुए वे नजर आएं.

पूरे करियर के दौरान राजेंद्र नाथ कई हिट फिल्मों में काम किया जिनमें ‘दिल देके देखो’, ‘फिर वहीं दिल लाया हूँ’, ‘जब प्यार किसी से होता है’, ‘शरारत’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘मुझे जीने दो’, ‘जानवर’, ‘जीवन-मृत्यु’, ‘बेखुदी’, ‘जमाने को दिखाना है’, ‘प्रेम रोग’ आदि जैसी फ़िल्में शामिल है. उस दौर में राजेंद्र नाथ नासिर हुसैन और शम्मी कपूर जैसे सितारों की जरूरत बन चुके थे. दर्शक इस जोड़ी को पर्दे पर देखना चाहते थे. अपनी अलग शैली के कारण राजेंद्र नाथ बड़े-बड़े धुरंधरों की मौजूदगी के बावजूद उस दौर में अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे. 13 फरवरी, 2008 को राजेंद्र नाथ दर्शकों के दिलों में अपनी छाप छोड़ते हुए इस दुनिया से विदा हो गए.

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