जब हेमा मालिनी ने गोविंदा को थप्पड़ मारकर बनाया अपनी फिल्म का हीरो

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अपने करियर के सुनहरे दौर में गोविंदा ने निर्माताओं को काफी परेशान किया करते थे. यहां तक कि कई बार बड़े निर्माताओं को भी वो बक्शते नहीं थे, एक बार उन्होंने हेमा मालिनी को भी काफी परेशान किया. तब अमूमन शांत दिखने वाली हेमा मालिनी ने जब गोविंदा को अपना रौद्र रूप दिखाया तो गोविंदा को पता चला कि बसंती सिर्फ बक बक ही नहीं करती बल्कि जरूरत पड़ने पर हाथ पैर भी चलाती हैं.

1990 में हेमा मालिनी महेश भट्ट के साथ फिल्म ‘जमीन ‘ में काम कर रही थी. फिल्म तो नहीं बनी लेकिन हेमा जी को महेश भट्ट का काम काफी पसंद आया. इसलिए उन्होंने उनके निर्देशन में फिल्म ‘आवारगी’ बनाने का ऐलान किया. इस फिल्म के लिए उन्होंने गोविंदा को लीड रोल के लिए साइन भी कर लिया. लेकिन बाद में स्क्रिप्ट में थोड़ा फेर बदल कर फिल्म को दो हीरो की कहानी बना दी और दूसरे हीरो के लिए अनिल कपूर को साइन किया गया. सारी समस्या यहीं से शुरू हुई.

गोविंदा अनिल कपूर के साथ काम करने को राजी नहीं थे. इसलिए फिल्म साइन करने के बाद वो डेट्स का बहाना बनाने लगे लेकिन महेश भट्ट की जिद्द थी कि गोविंदा ने कॉन्ट्रेक्ट साइन किया है तो उन्हें इस फिल्म में काम करना ही होगा. गोविंदा के इस रवैये से परेशान हेमा ने इसकी शिकायत धर्मेंद्र से की तो धरम जी ने गोविंदा को एक दिन अपने घर पर बुला लिया.

धर्मेंद्र ने उन्हें समझाने की काफी कोशिश की लेकिन गोविंदा वहां भी डेट्स का बहाना बनाने लगे. गोविंदा के इस नाटक से हेमा का पारा चढ़ गया और उन्होंने एक जोरदार थप्पड़ गोविंदा को रसीद कर दिया, जिससे गोविंदा बुरी तरह बौखला गए. तब धर्मेंद्र जी ने गोविंदा से पूछा बात अगर अब भी समझ में नहीं आई हो तो मैं भी अपना हाथ साफ़ कर लूं. गोविंदा को शायद बात समझ में आ चुकी थी इसलिए उन्होंने शूटिंग शेड्यूल के बारे में पूछा. इस तरह हेमा ने गोविंदा को अपनी फिल्म का हीरो बनाया. थप्पड़ से ही सही ये फिल्म गोविंदा के करियर में एक बड़ी हिट साबित हुई और इसके लिए उन्होंने हेमा जी का शुक्रिया भी अदा किया था.

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