MD.RAFI:वो गाना जिसने रफ़ी साहब को अस्पताल पहुंचा दिया 

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1960  में प्रदर्शित निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म “बैजू बावरा” अपने मधुर गीत-संगीत के कारण एक बड़ी कामयाब फिल्म साबित हुई थी। संगीतकार नौशाद द्वारा संगीतबद्ध इस फिल्म का एक-एक गाना हिंदी फिल्म संगीत के अमूल्य धरोहर की तरह हैं। इसी फिल्म में रफ़ी साहब द्वारा गाया गया “ओ दुनिया के रखवाले ” गाना  इस महान गायक के जीवन का सर्वश्रेष्ठ गीत साबित हुआ लेकिन इसकी रिकॉर्डिंग ने रफ़ी साहब को अस्पताल पहुंचा दिया। ये गाना विशुद्ध शास्त्रीय राग दरबारी पर आधारित है जिसके रचयिता तानसेन माने जाते हैं। इस गाने को जिस तरह तार सप्तक में प्रस्तुत किया गया है, वो सचमुच अनोखा है। इस गाने को शास्त्रीय मान्यता भले ही प्राप्त ना हो क्योंकि ये गाना शास्त्रीय तालों में निबद्ध  नहीं है लेकिन शास्त्रीय गायकों के बीच इसे बहुत आदर सम्मान दिया जाता है। 

“ओ दुनिया के रखवाले ” की रिकॉर्डिंग से पूर्व नौशाद साहब मुहम्मद रफ़ी को रोज अपने घर बुलाते और आवाज को ज्यादा से ज्यादा ऊपर उठाने का अभ्यास करवाते। नौशाद, रफ़ी की आवाज को आख़िरी रेंज तक ले जाना चाहते थे। कई दिनों के अभ्यास के बाद जब रफ़ी ने अपनी आवाज की आख़िरी रेंज को छू लिया तो नौशाद ने इसकी रिकॉर्डिंग की तैयारियां शुरू कर दी। निश्चित समय पर गाना रिकॉर्ड करवाने रफ़ी साहब स्टूडियो पहुंचे। अभ्यास काफी सधा हुआ था इसलिए शुरुआत में ज्यादा दिक्कतें नहीं आई लेकिन अंतिम आलाप में रफ़ी अपनी आवाज को इतनी ऊंचाई पर ले कर चले गए कि उनकी स्वरतंत्रियों में झमक पैदा हो गया और उनके गले में खून उत्तर आया लेकिन इसके बावजूद वो रुके नहीं और गाना जारी रखा।
 रिकॉर्डिंग समाप्त होते ही जब नौशाद ने उनके गले से खून बहते देखा तो घबड़ा  उठे। उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें तीन हफ्ते तक रिकॉर्डिंग से दूर रहने की हिदायत दी। फिल्म संगीत के इतिहास में राग दरबारी पर आधारित जितने भी गाने हैं, उनमें “ओ दुनिया के रखवाले” सर्वश्रेष्ठ रचना मानी जाती है। 

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