गुलज़ार ने क्यों खाई थी राजेश खन्ना के साथ काम ना करने की कसम !

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गुलज़ार साहब ने हृषिकेश मुखर्जी के लिए कई फिल्मों के गाने लिखे थे. उनमें से अधिकांश फिल्मों में राजेश खन्ना ही लीड रोल में हुआ करते थे. यही वजह है कि खन्ना और गुलज़ार साहब में अच्छी बोन्डिंग हो गई थी. इसलिए जब गुलज़ार साहब ने फिल्म ‘किनारा’ के निर्देशन का फैसला किया तो उनके जेहन सबसे पहला नाम खन्ना का ही आया. लेकिन उनका पहला ही अनुभव ऐसा साबित हुआ कि उन्होंने खन्ना को लेकर फिल्म बनाने का ख्याल हमेशा के लिए दिल से निकाल दिया.

गुलज़ार साहब ने जब अपनी इस फिल्म में राजेश खन्ना को लेने की ख्वाहिश जाहिर की तो खन्ना ने उन्हें कहानी सुनाने के लिए अपने बंगले पर बुलाया. गुलज़ार साहब शाम सात बजे खन्ना को कहानी सुनाने उनके बंगले पर पहुंच गए. लेकिन तब तक खन्ना का दरबार लग चुका था, जिसमें उनके दरबारी और चमचे जाम उठाना शुरू कर चुके थे. गुलज़ार साहब शराब नहीं पीते थे इसलिए उन्हें बाहर इंतज़ार करने को कहा गया.

इधर पीने-पिलाने का दौर रात एक बजे तक चलता रहा और गुलज़ार साहब बाहर बैठकर इंतज़ार करते रहे. रात एक बजे जब खन्ना की महफिल ख़त्म हुई तो उन्हें घर जाने और दूसरे दिन आने को कहा गया. गुलज़ार साहब अपनी इस बेइज्जती से इतने आहत हो गए कि उन्होंने ना केवल खन्ना के साथ फ़िल्में बनाने से तौबा कर ली बल्कि खन्ना की फिल्मों के गाने लिखने भी बंद कर दिए. बाद में गुलज़ार ने जितेंद्र को लेकर ये फिल्म बनाई जो उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है.

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