राजकुमार के उस थप्पड़ की गूंज दिलीप कुमार को 33 सालों तक सुनाई देती रही

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अभिनेता राजकुमार आले दर्जे के अक्खड़ और मुंहफट इंसान थे. उनकी सबसे बड़ी खासियत ये थी कि वो कभी किसी को खुद पर हावी नहीं होने देते थे भले ही सामने कितना भी बड़ा एक्टर क्यों ना हो. साल 1959 में राजकुमार, दिलीप कुमार के साथ फिल्म पैगाम में काम कर रहे थे. उन दिनों राजकुमार इंडस्ट्री में नए जबकि दिलीप कुमार अपना सिक्का जमा चुके थे. दिलीप कुमार स्टार थे तो जाहिर है फिल्म में सारी तवज्जो उनको ही मिल रही थी, जिससे राजकुमार अंदर से काफी चिढ़े हुए रहते थे. इस फिल्म में राजकुमार दिलीप कुमार के बड़े भाई का रोल कर रहे थे. फिल्म के एक सीन में राजकुमार को दिलीप साहब को थप्पड़ मारना था. राज कुमार ने सच में जोरदार थप्पड़ दिलीप कुमार को रसीद कर अपना सारा गुस्सा निकाल लिया. राज साहब की इस हिमाकत को देख दिलीप कुमार सन्न रह गए और फिर कभी उनके साथ काम ना करने की कसम खा ली.

फिर 32 सालों बाद निर्माता-निर्देशक सुभाष घई ने इन दोनों महारथियों को अपनी फिल्म ‘सौदागर’ में एक साथ काम करने को राजी कर लिया. दरअसल राजकुमार बतौर एक्टर केवल दिलीप कुमार को ही अपनी टक्कर का मानते थे. उनके मुताबिक़ इंडस्ट्री में अगर कोई उनके बाद अच्छा एक्टर है तो वो दिलीप कुमार ही हैं. इसलिए उन्होंने इस चैलेंज को स्वीकार कर लिया लेकिन इसके लिए दिलीप कुमार को मनाने में सुभाष घई को काफी पापड़ बेलने पड़े और आखिर दिलीप साहब मान ही गए.

सौदागर में दिलीप कुमार और राजकुमार भले ही दोस्त के किरदार में थे लेकिन आपको ये जानकार हैरानी होगी कि पूरी फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट से बाहर दोनों ने एक-दूसरे से कभी बात नहीं की. दोनों अपना-अपना शॉट देते और अपने कमरे में चले जाते. शायद सालों पहले पड़े थप्पड़ की गूंज को दिलीप साहब भूल नहीं पाए थे. ये सुभाष घई की किस्मत ही थी कि पूरी फिल्म इन दोनों बड़े कलाकारों के किसी टकराव के बगैर पूरी हो गयी. सालों बाद अपने दो पसंदीदा एक्टर को एक साथ देखना दर्शकों के लिए एक सुखद अनुभव था और इस तरह ये फिल्म कामयाब साबित हुई.

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