Simi Garewal : इस हीरोइन को साइन करने खुद उनके घर पहुंच गए राज कपूर

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सिमी ग्रेवाल जब छोटी थी जब उनके दोस्त ‘आवारा हूं, गर्दिश में हूं, आसमान का तारा हूं..’ गाना गाया करते थे. सिमी ने अपने पिता से पूछा था कि उनके दोस्त रात-दिन यही गाना क्यों गाया करते हैं? तब पिता ने हंसते हुए कहा था कि एक दिन तुम्हें उस आवारा से मिलवाएंगे तब बात समझ में आ जाएगी. एक दिन सिमी के पिता ने जमशेदपुर के रतन हाल में सिमी को ‘आवारा’ दिखाने ले गए. फिल्म को देखते हुए सिमी इस कदर खो गयी कि द एंड के बाद भी उसी परदे को ताकती रह गयी, मानो उसी के पीछे राजकपूर बैठे हुए हों.

सिमी अपनी पढाई के लिए इंग्लैण्ड चली गयी. जब लौटी तो फिल्मों में काम करने का फैसला कर लिया. बंबई आकर संघर्ष करने लगी. लेकिन राजकपूर के लिए जो दीवानगी पैदा हुई थी, वह बरकारार थी. एक दिन उन्होंने चांस लेकर राजकपूर को अपना गलत नाम बताकर फोन कर दिया. बातें इतनी दिलचस्प रही कि यह रोज का सिलसिला बन गया. राज साहब ने एक दिन चर्चगेट के पास गेलार्ड होटल में मिलने के लिए बुला लिया. सिमी ने उस पहली मुलाक़ात को यादगार बनाने के लिए राजकपूर को अपनी लिखी एक कविता और गुलाब का फूल भेंट किया. वे बहुत खुश हुए और ‘मिलते रहा करो’ कहकर चले गए. सिमी ने कभी यह जाहिर नहीं होने दिया कि वह उनके साथ काम करना चाहती हैं. लेकिन सिमी को यह पता था कि उनके लायक कभी किसी फिल्म में रोल आएगा तो वे जरुर याद करेंगे.

वह मौक़ा आ गया. एक शाम सिमी के घर का फोन बजा. सिमी की मम्मी ने फोन उठाया. उधर से आवाज़ आयी ‘मैं राजकपूर बोल रहा हूं, क्या मिसेज गरेवाल से बात हो सकती है?’ बात हुई. लेकिन सिमी की मां को आश्चर्य हुआ कि राज साहब उनसे क्यों मिलना चाहते हैं? उन्होंने सिमी से जानना चाहा तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की. अगले दिन राज साहब शाम को फूलों के साथ मिलने आ गए. हाथ जोड़ते हुए विनम्र भाव के साथ कहा, ‘अगर आप इजाज़त दें तो आपकी इस बेटी को मैं अपनी फिल्म में हीरोइन लेना चाहता हूं.’ सिमी और उनकी मां के लिए यह हैरान करने वाली बात थी. वे चाहते तो अपने ऑफिस में बुला सकते थे लेकिन अपनी हीरोइन लेकर कर उनके मन में जो सम्मान का भाव रहता था, उसका परिचय था यह. इस तरह सिमी फिल्म  ‘मेरा नाम जोकर’ में पहले भाग की नायिका बनी.

सिमी को बड़े निर्देशकों जैसे राज कपूर, सत्यजीत रे, मृणाल सेन और राज खोंसला के साथ काम करने का मौका मिला. फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ और ‘सिद्घार्थ’ उनकी दो सबसे चर्चित फिल्में रहीं. साल 1980 की शुरूआत में इन्होंने लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में काम करना शुरू किया. इन्होंने अपनी खुद की प्रोडक्शन कपंनी ‘सिगा आर्ट इंटरनेशनल’ बनाई. जिसमें इन्होंने दूरदर्शन के लिए एक टीवी सीरिज ‘इट्स वूमेन वर्ल्ड’ का निर्दशन, निर्माण और लेखन का कार्यभार संभाला. सिमी ग्रेवाल ने एक हिंदी फीचर फिल्म ‘रूखसत’ का लेखन और निर्देशन किया. इसके साथ ही एक टेलीविजन कमर्शियल्स का निर्माण किया. इन्होंने टेलीविजन पर वापसी की और स्टार प्लस के टॉक शो ‘इंडियाज मोस्ट डिजायरेबल’ में होस्ट बनी जिसमें इन्हें बॉलीवुड, बिजनेसमैन, इंडियन क्रिकेटर्स और मीडिया के नामी लोगों का इंटरव्यू लेना होता था. सिमी ने बीबीसी के डॉक्यू ड्रामा ‘महाराजास’ के लिए भी काम किया.

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