जब राज बब्बर के नाम से काँप उठती थी लडकियां

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80 के दशक में राज बब्बर बॉलीवुड के लिए ऐसे ट्रैम्प कार्ड की तरह होते थे जो किसी भी तरह के रोल में आसानी से फिट बैठ जाते थे. उन्हें कमर्शियल और पैरेलल दोनों धाराओं में कामयाब माना जाता था. उन्होंने श्याम बेनेगल, केतन मेहता, मुजफ्फर अली जैसे फिल्मकारों के अलावा शक्ति सामंत, बी आर चोपड़ा और महेश भट्ट जैसे फिल्मकारों के साथ भी काम किया जो अलग-अलग धाराओं का प्रतिनिधित्व करते थे. बतौर अभिनेता राज बब्बार की खासियत ये थी कि वो खुद को कभी टाइपकास्ट ही नहीं होने देते थे. एक ही साल वो हीरो भी बने और विलेन भी. विलेन भी ऐसे कि ऐसे रोल निभाने में बड़े-से-बड़े विलेन के हाथ-पाँव भी फूल जाएं. बी आर चोपड़ा की फिल्म इंसाफ का तराजू’ में उन्होंने रमेश गुप्ता नाम के एक रेपिस्ट का रोल इतना बखूबी निभाया कि फिल्म प्रदर्शित होने के बाद लडकियां उनके नाम से ही कन्नी काटने लगी थी.

1980 में बी आर चोपड़ा ने उन्हें अपनी फिल्म ‘इन्साफ का तराजू’ में विलेन के रोल में कास्ट किया. चोपड़ा साहब जैसे बड़े निर्माता-निर्देशक के साथ काम करने का मौक़ा मिलने के बाद राज बब्बर फूले नहीं समा रहे थे लेकिन उनकी ये खुशी तब काफूर हो गयी जब चोपड़ा साहब ने उन्हें रोल सुनाया.
इस फिल्म में उन्हें ज़ीनत अमान के साथ एक रेप सीन करना था जो काफी हिंसक और वितृष्णा पैदा करने वाला था. चोपड़ा साहब ने जब इस सीन की सिचुएशन राज बब्बर को सुनाई तो वो अवाक रह गए. . ये रोल इतना घिनौना था कि खुद राज बब्बर इस बात के लिए श्योर थे कि लोगों के बीच इसका संदेश गलत ही जाएगा. इसलिए उन्होंने चोपड़ा से गुजारिश की कि उनके किरदार को थोड़ा टोन डाऊन कर दिया जाए. लेकिन चोपड़ा साहब इसके लिए तैयार नहीं हुए और मजबूरन राज बब्बर को इस सीन के लिए तैयार होना पड़ा.

सीन के दौरान उन्हें ज़ीनत अमान को थप्पड़ मारते हुए उनके कपडे फाड़ने थे. ज़ीनत उनके सीनियर थी और इंडस्ट्री की बड़ी अभिनेत्रियों में गिनी जाती थी. जाहिर है शूटिंग के दौरान राज बब्बर बार-बार नर्वस हो जाते और रीटेक पर रीटेक दिए जाते. बार-बार रीटेक होने से चोपड़ा साहब का मूड उखड गया. इधर राज बब्बर जरूरत से ज्यादा मायूस हो गए. ऐसे हालात में खुद ज़ीनत अमान उनकी मदद को आगे आयी. ज़ीनत ने उन्हें इस सीन की जरूरत और उनके किरदार के बारे में बारीकी से समझाया तो उन्हें थोड़ा हौसला बंधा. शूटिंग शुरू हुई तो राज बब्बर में एक झन्नाटेदार थप्पड़ ज़ीनत को जड़ दिया और उन पर टूट पड़े. राज बब्बर की इस फ़िल्मी हैवानियत पर खुद ज़ीनत भी अवाक रह गयी. आखिरकार ये शॉट ओके हो गया.
1980 में प्रदर्शित ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई. राज बब्बर ने भले ही इस फिल्म में विलेन का रोल किया था लेकिन फिल्मफेयर अवार्ड के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर की कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया था.

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