Rajesh Khanna (Part-14) : जब खन्ना को लेकर मुमताज और शर्मिला टैगोर में छिड़ गई जंग

0
19
साल 1969 से 1972 के बीच राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के पारस साबित हुए. वो जिस चीज को हाथ लगाते वही सोना बन जाती. एक के बाद एक आई हिट फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री का चहेता बना रखा था. ऐसे में भला अभिनेत्रियां भी राजेश खन्ना को सीढ़ी बनाकर ऊपर चढ़ने से पीछे क्यों रहती. अंजू महेंद्रू तो पहले से ही उनके जीवन में थी ही. शर्मिला टैगोर के साथ उनका ऑनस्क्रीन रोमांस ऑफ स्क्रीन भी शेप ले चुका था. बाद में इस चलती गाड़ी में अभिनेत्री मुमताज़ भी सवार हो गयी, इस तरह राजेश खन्ना तीन शिफ्टों में इश्क और चार शिफ्टों में काम करने लगे.

अभिनेत्री मुमताज़ का राजेश खन्ना की तरफ झुकाव शुद्ध रूप से व्यवसायिक था. मुमताज़ उन दिनों बी-ग्रेड फिल्मों की क्वीन मानी जाती थी और कोई भी बड़ा हीरो जैसे धर्मेंद्र, शशि कपूर आदि उनके साथ काम करने को राजी नहीं होते थे. ऐसे में राजेश खन्ना, मुमताज़ के लिए काफी लकी साबित हुए. खन्ना ने ही राज खोसला से फिल्म ‘दो रास्ते’ के लिए मुमताज़ के नाम की सिफारिश की थी. फिल्म हिट रही और इसके साथ ही मुमताज़ का नाम भी ए-ग्रेड हीरोइन में शामिल हो गया. बाद में इन्होंने ‘सच्चा-झूठा’ और ‘दुश्मन’ जैसी हिट फिल्में भी दी. मुमताज, खन्ना से रोमांस कर उनका एहसान उतार रही थी.

उधर खन्ना के जीवन में मुमताज की बढ़ती सरगर्मी के कारण शर्मिला टैगोर और मुमताज के बीच शीतयुद्ध की शुरुआत हो चुकी थी. शर्मिला के साथ राजेश खन्ना के रिलेशन का आलम ये था कि डिंपल कपाडिया के साथ शादी होने के बाद भी राजेश खन्ना का ज्यादातर समय शर्मिला के मेकअप रूम में ही गुजरता था और ये सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक शर्मिला की जिंदगी में नवाब पटौदी नहीं आ गए. खैर…

शर्मिला और मुमताज के बीच बैलेंस बनाकर खन्ना बड़ी होशियारी से करियर को रफ़्तार देने में जुटे थे. इन दोनों से बचा समय अंजू महेंद्रू के खाते में आ जाता था. लेकिन खन्ना शायद केवल रोमांटिक हीरो ही नहीं थे, बल्कि वो सर से पैर तक रोमांस में डूबे हुए थे. तीन-तीन हसीनाओं के बीच एक चौथी हसीना की एंट्री हो गयी और जल्द ही खन्ना की जिंदगी और करियर दोनों का समीकरण बदल गया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here