जब माधुरी-रजनीकांत की बढ़ती नजदीकियों से नाराज सुभाष घई ने बदल दी फिल्म की कहानी

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सुभाष घई के बारे में कहा जाता है कि वो जिन अभिनेत्रियों को भी ब्रेक देते हैं उन्हें अपनी प्रॉपर्टी समझने लगते हैं. उस हीरोइन को हर काम घई की मर्जी से करना होता है. यहीं वजह है जिन अभिनेत्रियों को भी उन्होंने ब्रेक दिया आगे चलकर उनसे उनका झगड़ा ही हो गया. माधुरी दीक्षित को घई ने तो बॉलीवुड में ब्रेक नहीं दिया लेकिन उन्हें नंबर वन अभिनेत्री बनाने में घई का सबसे बड़ा योगदान है. शुरुआत से ही घई माधुरी पर कड़ी नजर रखते थे. एक बार घई को रजनीकांत और माधुरी की नजदीकियों से इतनी समस्या हो गई कि उन्होंने फिल्म की कहानी ही बदल डाली .

साल 1987 में सुभाष घई ने अपने असिस्टेंड प्रभात खन्ना के निर्देशन में फिल्म ‘उत्तर दक्षिण’ की शुरुआत की और इस फिल्म में रजनीकांत के साथ माधुरी को भी कास्ट किया. माधुरी शुरुआत से ही रजनीकांत की दीवानी थी. जब साथ काम करने का मौक़ा मिला तो ये दीवानगी क्लोज्नेस का रूप लेने लगी. माधुरी अक्सर रजनीकांत से घुल-मिलकर बातें करती और अपने घर से उनके लिए खाना लेकर आती. धीरे-धीरे दोनों गहरे दोस्त बन गए.

सुभाष घई को माधुरी और रजनीकांत की ये केमिस्ट्री रास नहीं आई. घई नहीं चाहते थे कि माधुरी और रजनीकांत के बीच कोई स्पेशल बौन्डिंग बने. इसलिए उन्होंने अपनी चालें चलनी शुरू कर दी. उन्होंने निर्देशक को ऐसा अरेजमेंट करने को कहा ताकि माधुरी और रजनीकांत सेट पर एक साथ मौजूद ना हो. इसलिए दोनों के शूट अलग-अलग टाइम पर लिए जाने लगे. रजनी और माधुरी की मुलाकातों का सिलसिला रुक गया. इस तरह घई अपने इरादों में तो कामयाब हो गए लेकिन उनकी इस साजिश ने पूरी फिल्म का कबाड़ा कर दिया. इस तरह उत्तर-दक्षिण एक सुपर फ्लॉप फिल्म साबित हुई.

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