Rajesh Khanna (Part-26) : जब खन्ना ने चुनावी मैदान में शत्रुघ्न सिंहा को किया ‘खामोश’

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राजेश खन्ना और शत्रुघ्न सिन्हा में वैसे तो कभी दोस्ती नहीं रही, लेकिन इनके बीच रिश्ता दुश्मनी का भी नहीं था. दरअसल शत्रुघ्न सिन्हा को अमिताभ खेमे का माना जाता था, जो दोनों सितारों के बीच पुल का काम किया करते थे. 1991 में एक ऐसी घटना हुई जब खन्ना और सिन्हा के बीच बोलचाल पूरी तरह बंद हो गई. हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा ने काका से रिश्ते सामान्य बनाने की काफी कोशिशें की लेकिन खन्ना ने मरते दम तक उन्हें माफ़ नहीं किया. आइये जानते हैं खन्ना और सिन्हा की इस रंजिश की वजह…

साल 1992 में आडवानी के इस्तीफे के बाद जब उपचुनाव की घोषणा हुई तो कांग्रेस ने राजेश खन्ना को अपना उम्मीदवार बनाया जिसके जवाब में भाजपा ने शत्रुघ्न सिन्हा को मैदान में उतारा. दो अभिनेताओं के मैदान में उतरने से पूरी दिल्ली सिनेमा का पर्दा बन गई. कही ‘पुष्पा-आई हेट टीयर्स’ पर ठहाके गूंज रहे थे, तो कहीं ‘खामोश’ पर तालियां बज रही थी. चुनावी कैम्पेन के दौरान शत्रु ने राजेश खन्ना को मदारी का खिताब दे दिया. जो भी हो इस उपचुनाव में सिन्हा और बीजेपी की तमाम कोशिशों के बावजूद खन्ना 25,000 वोटों से सिन्हा को हराकर चुनाव जीत गए.

खन्ना एम् पी तो बन गए लेकिन सिन्हा द्वारा उन्हें मदारी और बंदर कहने की बात वो भूल नहीं पाए. हालांकि, उन्हें चोट लगी और उसके बाद सिन्हा से कभी बात नहीं की. सिन्हा ने खन्ना के साथ अपनी दोस्ती का पुनर्निर्माण करने की काफी कोशिश की, हालांकि 2012 में खन्ना की मौत तक कभी संभव नहीं हुआ. खन्ना को सिन्हा की ये बात काफी चुभ गई थी हालंकि सिन्हा इसे चुनावी पैंतरेबाजी बताकर खन्ना को सफाई देने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन राजेश खन्ना ने सिन्हा को इसके लिए माफ़ नहीं किया और आख़िरी दम तक सिन्हा से दुश्मनी निभाई.

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