जानिए ! क्यों देव आनंद की हीरोइन बनने के लिए धर्मेंद्र की फ़िल्में ठुकरा देती थी हेमा मालिनी

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देव आनंद की उम्र भले ही अपनी रफ़्तार से आगे बढ़ती रही, लेकिन देव साहब दिल से कभी बूढ़े नहीं हुए. जवानी उनके नस-नस में समाई हुई थी और वो इसका अहसास दूसरों को भी बखूबी करवा देते थे. देव साहब की इन अदाओं का उनके को-स्टार्स पर जादुई असर पड़ता था. फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’ के दौरान हेमा मालिनी पर देव साहब का कुछ ऐसा असर हुआ कि हेमा ने उम्र में लगभग दूने देव साहब की हीरोइन बनने के लिए  धर्मेंद्र के साथ कई फ़िल्में ठुकरा कर सबको हैरत में डाल दिया था.

साल 1970 में हेमा मालिनी को देव साहब के साथ फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’ का ऑफर मिला तो वो उलझन में पड़ गई. देव साहब के उम्र के सारे कलाकार यानी दिलीप कुमार, राज कपूर आदि ने उम्र के हिसाब से किरदार करने शुरू कर दिए थे, लेकिन देवसाहब अभी भी रोमांटिक रोल ही कर रहे थे. उम्र में दूने देव आनंद की प्रेमिका का रोल हेमा करना नहीं चाहती थी पर जब निर्देशक विजय आनंद ने उन्हें समझाया तो वो तैयार हो गई. इस फिल्म के एक गाने की शूटिंग बिहार के राजगीर इलाके में हो रही थी. एक सीन में देव आनंद और हेमा मालिनी को केबल तार से लटकते हुए पहाड़ से नीचे स्थित बुद्ध के मंदिर तक जाना था. हेमा मालिनी इस सीन को करने से काफी घबरा रही थी, आखिर वो तैयार हुई तो एक नई मुसीबत आ गयी. जैसे ही देव और हेमा तार से लटकते हुए बीच- बीच पहुंचे केबल जाम हो गया और दोनों हवा में ही लटक गए. हेमा मालिनी बुरी तरह घबरा कर रोने लगी.

देव साहब हेमा का डर दूर भगाने के लिए अपनी लव स्टोरी सुनाने लगे ताकि उनका डर दूर हो सके. देव साहब हेमा का मन तब तक बहलाते रहे जब तक केबल शुरू नहीं हो गया .इस घटना ने हेमा के दिल में देव साहब की एक ख़ास जगह बना दी. भले ही इसे रोमांस या प्यार का नाम ना दिया जा सके, लेकिन हेमा पर देव साहब का इतना असर था कि देव साहब के साथ काम करने के लिए वो धर्मेंद्र की फ़िल्में भी ठुकरा देती थी. इस फिल्म के बाद हेमा मालिनी ने देव साहब के साथ ‘तेरे मेरे सपने’, ‘अमीर गरीब’, ‘छुपा रुस्तम’ सहित दर्जन भर फिल्मों में काम किया. आख़िरी बार दोनों साल 2001 में फिल्म ‘सेंसर’ में नजर आए.

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