सुनील दत्त का क़र्ज़ चुकाना चाहते थे फ़िरोज़ खान,खामियाजा संजय दत्त ने उठाया

0
602
संघर्ष के दिनों में फिरोज खान को कोई बड़ा निर्माता अपनी फिल्मों में लेने को तैयार नहीं था. इसलिए फिरोज खान बी ग्रेड फिल्मों के जरिये अपने करियर को परवान चढाने की कोशिशों में जुटे थे. इन्हीं दिनों सुनील दत्त ने उन्हें 1966 में अपनी होम प्रोडक्शन फिल्म ‘रात और दिन’ में एक बड़ा मौक़ा दिया. इस फिल्म के बाद फिरोज खान के स्टेटस में जबरदस्त बदलाव आया और उन्हें बड़े बैनर की फ़िल्में मिलने लगी. दत्त साहब के इस एहसान को फिरोज खान ने हमेशा याद रखा और जब वो फिल्म ‘यलगार’ का निर्माण कर रहे थे तब उन्होंने संजय दत्त को इस फिल्म में कास्ट कर इस एहसान को उतारना चाहा लेकिन फिरोज खान की सोहबत आगे चलकर संजय दत्त के लिए जी का जंजाल बन गयी.

‘यलगार’ के क्लाइमैक्स की शूटिंग दुबई में हुई थी और दाऊद इब्राहिम इस मौके पर ख़ास मेहमान के तौर पर मौजूद थे. यहीं फिरोज खान ने संजय दत्त की मुलाकात दाऊद से करवायी थी. दाऊद से मुलाक़ात के बाद संजय दत्त और भगोड़े डॉन की दोस्ती दिनों-दिन गहरी होती चली गई. संजय दत्त बॉलीवुड में दाऊद के रसूख का इस्तेमाल करने लगे जिससे खुद फिरोज खान भी अवाक रह गए. दाऊद के रंग में पूरी तरह रंग चुके संजय दत्त से फिरोज खान ने तो कन्नी काट ली, लेकिन बाबा पर ताकत का नशा कुछ ज्यादा ही हावी हो गया जिसका नतीजा एक दिन मुंबई बम विस्फोट कांड में उनकी गिरफ्तारी के रूप में सामने आया.

इस मामले में संजय दत्त की गिरफ्तारी सुनील दत्त के लिए वज्रपात के समान थी. बेटे के साथ दत्त साहब भी लपेटे में आ गए और उनकी काफी बदनामी हुई. जिसका दाग धोने के लिए उन्हें ऐसी शख्सियत की शरण में आना पड़ा जिनका वो राजनैतिक विरोधी थे. संजय दत्त के इस करतूत की कीमत सुनील दत्त को अपना राजनैतिक करियर गवांकर चुकाना पड़ा.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here