जब धर्मेंद्र ने दी राज कुमार को जान से मारने की धमकी

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80 के दशक में कहा जाता था कि इंडस्ट्री में बस दो ही शेर हैं. एक धर्मेंद्र और दूसरे राज कुमार. धर्मेंद्र जहां जरूरत पड़ने पर हाथ-पैर का इस्तेमाल भी करने लगते थे वहीं राज कुमार अपनी बातों से ही दुश्मनों को धुल चटा देते थे. दोनों का खौफ इंडस्ट्री पर इस कदर छाया हुआ था कि दूसरे अभिनेता उनसे दूर रहने में ही भलाई समझते थे. 1989 में राज एन सिप्पी की फिल्म ‘शहजादे’ के सेट पर इन दोनों शेरो का आमना-सामना हो ही गया. राज कुमार की किसी बात पर नाराज धर्मेंद्र ने उन्हें जान से मारने की धमकी दे डाली लेकिन राज कुमार भी राज कुमार थे. उन्होंने धर्मेंद्र से कुछ ऐसा कहा कि धर्मेंद्र अपना जख्म ही सहलाते रह गए.

1989 में एक्टर राजन सिप्पी ने निर्माता बनने का फैसला किया और शेह्जादे जैसी मल्टीस्टारर फिल्म बनाने का ऐलान किया जिसमें धर्मेंद्र, राज कुमार और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े स्टार शामिल थे. फिल्म की स्क्रिप्ट सबसे पहले राज कुमार को सुनाई गई और उन्हें अपना रोल खुद चुनने को कहा गया और उन्होंने अपने हिसाब से अपना रोल चुन भी लिया. लेकिन शूटिंग के लिए जब पहले दिन राज कुमार सेट पर आए तो उन्हें अपना रोल जमा नहीं. इसलिए उन्होंने धर्मेंद्र वाला रोल करने की इच्छा जाहिर की जिसे सिप्पी को मानना ही पड़ा. धर्मेंद्र भी अपने रोल की तैयारी करके आए थे लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें पता चला कि राज कुमार के कहने पर उनका किरदार बदल दिया गया है तो वो बुरी तरह नाराज हो गए. जैसे ही राज कुमार उनके सामने आए धर्मेंद्र ने उन्हें मां-बहन की गालियां देनी शुरू कर दी. राज कुमार की एक आदत ये थी कि वो कभी रिएक्ट नहीं करते थे बल्कि मुस्कुराते रहते थे जो सामने वाले के गुस्से की आग में घी डालने का काम करते थे. इस बार भी वो गुस्से में बौखलाए धर्मेंद्र को देख मुस्कुराने लगे जिससे धर्मेंद्र और भड़क उठे.

राज कुमार पर अपने गुस्से का कोई असर ना होते देख धर्मेंद्र गालियां देते हुए राज कुमार की तरफ बढ़े तो वहां मौजूद शत्रुघ्न सिन्हा और यूनिट के लोगों ने उन्हें जकड लिया. धर्मेंद्र गुस्से में राज कुमार को जान से मारने की धमकियां दिए जा रहे थे और राज कुमार बस मुस्कुराए जा रहे थे. जैसे-तैसे धर्मेंद्र को शांत कर दूर ले जाया गया. मामला शांत होने के बाद राज एन सिप्पी इस घटना के लिए माफी मांगने राज कुमार के पास पहुंचे तो उन्होंने अपने चितपरिचित अंदाज़ में धर्मेंद्र पर फब्तियां कसी -“कुत्तों के भौंकने से शेर अपना रास्ता नहीं बदला करता.” चमचों ने राज साहब की ये टिपण्णी धर्मेंद्र तक पहुंचा भी दी. लेकिन धर्मेंद्र केवल मन मसोस कर रह गए .

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