Dharmendra (Part-9) : धर्मेंद्र ने ऐसे चुकाया गुरुदत्त के एहसान का बदला

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दोस्तों ! जैसा की हमने आपको पिछले एपिसोड में बताया था की गुरुदत्त ने फिल्मफेयर के टैलेंट हंट प्रतियोगिता में शामिल धर्मेंद्र को नर्वस देख उनका काफी हौसला बढ़ाया था, जिसकी वजह से गुरुदत्त को लेकर उनके मन में काफी सम्मान था. हालंकि दोनों कभी एक साथ काम नहीं कर पाए, लेकिन धर्मेंद्र मानते थे प्रतियोगिता में उनकी हौसला आफजाई कर गुरुदत्त ने उनपर एहसान किया है. इसलिए जैसे ही ये एहसान चुकाने का वक़्त आया धर्मेंद्र ने कोई कोताही नहीं बरती और इसके लिए उन्होंने अपने करियर की भी परवाह नहीं की. आइये जानते हैं धर्मेंद्र ने कैसे चुकाया गुरुदत्त का एहसान…

साल 1964 में गुरुदत्त अबरार अल्वी के निर्देशन में फिल्म ‘बहारें फिर भी आएंगी’ का निर्माण कर रहे थे. इस फिल्म के हीरो भी वही थे. लेकिन 10 अक्तूबर, 1964 को उन्होंने आत्महत्या कर ली और फिल्म लटक गई. ये फिल्म गुरुदत्त के लिए काफी महत्वपूर्ण थी. वो पहले से ही काफी क़र्ज़ में डूबे हुए थे. अल्वी जानते थे कि अगर ये फिल्म नहीं बनी तो गुरुदत्त के स्टूडियो का एक-एक सामन नीलाम हो जाएगा और उनका पूरा परिवार सड़क पर आ जाएगा. इसलिए इस फिल्म को पूरा करना बहुत जरुरी था.

गुरुदत्त की मौत के बाद अल्वी ने सुनील दत्त से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया. एक के बाद एक सभी बड़े अभिनेताओं ने जब इस फिल्म को ठुकरा दिया तो अल्वी को धर्मेंद्र का ध्यान आया. धर्मेंद्र उन दिनों काफी व्यस्त हो चुके थे और किसी नयी फिल्म के लिए समय निकाल पाना उनके लिए संभव नहीं था. धर्मेंद्र उन दिनों पंजाब में किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे. अल्वी ने जब उनसे मिलकर सारी कहानी बताई तब धर्मेंद्र ने ना केवल मुफ्त में काम करने का वादा किया बल्कि बाकी फिल्मों की शूटिंग कैंसिल कर इस फिल्म के लिए एकमुश्त डेट्स भी दे दी. ये फिल्म बनी और रिलीज भी हुई. भले ही फिल्म ज्यादा नहीं चली लेकिन धर्मेंद्र ने मरहूम गुरुदत्त को इस तरह जो श्रंद्धांजलि दी… वो वाकई काबिले तारीफ़ है.

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