War of Bollywood: जब Subhash Ghai से उलझना Dharmendra को काफी महँगा पड़ा

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अभिनेता धर्मेन्द्र के बारे में कहा जाता है कि वो निर्देशक के हीरो हैं यानि फिल्म निर्माण के दौरान वो सिर्फ अपने काम से काम रखते हैं और बाकी चीजों में हस्तक्षेप नहीं करते .लेकिन ये केवल तभी तक जब तक वो निर्माता या निर्देशक के काम के मुरीद हो. लेकिन इंडस्ट्री के शोमैन सुभाष घई का अनुभव धर्मेन्द्र को लेकर थोड़ा अलग है .घई का कहना है कि धर्मेन्द्र गैरजरूरी चीजों में भी बेवजह हस्तक्षेप किया करते थे . फिल्म ‘क्रोधी’ के दौरान इस बात को लेकर घई और धर्मेन्द्र के बीच जबरदस्त विवाद भी हो चुका है .काफी दिनों पहले सुभाष घई ने धर्मेन्द्र को लेकर एक घटना शेयर की थी कि कैसे उन्होंने जब एक फिल्म में धर्मेन्द्र को साइन किया तो धर्मेन्द्र ने निर्माता पर दबाव डाल कर घई की जगह दलाल गुहा को निर्देशक बनाने की सिफारिश की थी लेकिन बाद में धर्मेन्द्र को खुद इस फिल्म से हाथ धोना पड़ गया .क्या था मामला ? आइये जानते हैं..

1986 में रिलीज हुई सुभाष घई की blockbuster फिल्म ‘कर्मा’ के निर्माण की तैयारी उन्होंने 1975 से ही शुरू कर दी थी. घई ने जब इस फिल्म की कहानी विनोद दोषी और हरीश शाह को सुनाई तो उन्हें ये कहानी काफी पसंद आई और उन्होंने इस फिल्म के निर्माण की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली .
घई इस फिल्म में धर्मेन्द्र और ऋषि कपूर को लेना चाहते थे. दोनों निर्माताओं ने जब धर्मेन्द्र से बात की तो धर्मेन्द्र भी फिल्म में काम करने के लिए राजी हो गए .फिल्म साइन करते समय धर्मेन्द्र ने वादा किया था कि वो इस फिल्म के लिए एकमुश्त डेट्स देंगे .लेकिन जब फिल्म शुरू होने का समय आया तो धर्मेन्द्र आनाकानी करने लगे .धर्मेन्द्र डेट्स नहीं दे रहे थे और फिल्म लेट होती चली गई .इस तरह एक साल का समय बीत गया .दोनों निर्माता इस बात से काफी परेशान थे .एक दिन जब वो धर्मेन्द्र से मिलने गए तो उन्होंने कहा कि अगर वो सुभाष घई को फिल्म से हटाकर दलाल गुहा को निर्देशक बना दें तो वो डेट्स दे सकते हैं. फिल्म की कहानी और निर्देशन सुभाष घई का था .इसलिए जब दोनों निर्माताओं से घई को धर्मेन्द्र को ये शर्त सुनाई तो नाराज सुभाष घई ने धर्मेन्द्र को फिल्म से चलता कर दिया और उनकी जगह दिलीप कुमार को साइन कर लिया .खैर..दिलीप कुमार की एंट्री के बाद भी फिल्म को बनने में दस साल लग गए .1986 में’कर्मा’ रिलीज हुई .लेकिन अब इस फिल्म का निर्माण खुद सुभाष घई ने अपने बैनर मुक्ता आर्ट्स के तहत किया था.

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