वैजयंती माला ने दिलीप कुमार को सरेआम किया बेइज्जत !

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वैजयंती माला साउथ से आयी ऐसी पहली हीरोइन थी जो अपनी शर्तों पर काम करती थी. वह चाहे एक्टिंग की बात हो या प्यार-मोहब्बत की. जितनी चर्चा इन्हें अपनी फिल्मों से मिली उतनी ही चर्चा अफेयर के कारण भी हुई. राज कपूर से इस तरह जुड़ी कि कपूर परिवार बिखरने की स्थिति में पहुँच गया. कुछ वैसा ही दिलीप कुमार के साथ भी हुआ था.

‘देवदास’ के समय से ही आयी यह करीबी नया दौर, मधुमती, पैगाम के रास्ते ‘गंगा जमना’ तक पहुँच गयी. गंगा जमना के समय तो यह कहा जाने लगा कि शायद दोनों एक होने की तैयारी कर रहे हैं. इसके बाद दोनों ने ‘लीडर’ और फिर ‘संघर्ष’ में साथ-साथ काम किया लेकिन कहा जाता है कि लीडर के बाद दोनों के बीच कुछ ऐसी खटास आयी कि वे एक-दूसरे से बहुत दूर हो गए.

‘संघर्ष’ के पहले इसकी झलक मिल गयी थी फिल्म ‘चित्रलेखा’ के सेट पर. उसके दो साल पहले ‘संगम’ बनी थी और उसी से राज साहब के साथ प्यार का सिलसिला आगे बढ़ा था. शायद यही कारण था दिलीप साहब से दूर होने का. ‘चित्रलेखा’ में दिलीप साहब नहीं थे लेकिन वे वैजंतीमाला के सम्मोहन में एक दिन शूटिंग देखने चले गए.

उन्हें खबर मिली कि आज दिलीप साहब शूटिंग देखने आ रहे हैं. लेकिन युनिट के लोगों ने उनके चेहरे पर कोई खुशी या उत्सुकता नहीं देखी. इतिहास में चित्रलेखा वैशाली साम्राज्य की नगरवधु थी. एक नृत्यांगना. जाहिर है कि उस समय के लिबास की तरह ही कपड़े पहन रखे थे. आज की भाषा में कहें तो काफी सेक्सी लग रही थीं. दिलीप साहब अपने कुछ दोस्तों के साथ आए.

शॉट के लिए वैजंतीमाला को बुलाया गया. वह आयीं तो सही लेकिन लौटकर मेकअप रूम में जाकर बैठ गयी. यह देखकर निर्देशक लेख टंडन उन्हें खुद बुलाने चले गए. लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया. कहा, मैंने पहले ही बता दिया था कि उस सीन में कैमरामेन के अलावा केवल जरुरी लोग ही रहेंगे. लेख टंडन ने दिलीप साहब को बता दिया कि वैजंतीमाला सेट पर आने के लिए तबतक तैयार नहीं होगी, जबतक यहां बाहरी लोग रहेंगे. दिलीप कुमार ने मौके की नजाकत को समझकर वहां से जाने में ही भलाई समझी. दिलीप साहब को ये अपमान इतना खला कि उन्होंने फिर कभी ना तो वैजयंतीमाला के साथ कभी काम किया और ना ही उनसे बात की.

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