कभी की बस कंडक्टरी तो कभी बने रेडियो जॉकी,dilip kumar ने बदल दी किस्मत

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सुनील दत्त का बचपन काफी संघर्ष में गुजरा। आर्थिक तंगी ने बड़े होने पर भी उनका पीछा नहीं छोड़ा। घर चलाने के लिए उन्होंने कभी आर्मी में हवलदार की नौकरी की  तो कभी ट्रांसपोर्ट कंपनी में कंडक्टर की मामूली नौकरी की, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. जय हिंद कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सुनील थिएटर ग्रुप का हिस्सा बने. प्ले में इनकी आवाज से इंप्रेस होकर रेडियो चैनल के हेड ने रेडियो में नौकरी दे दी. तनख्वाह थी 25 रुपए.

 रेडियो की नौकरी के दौरान उन्हें  नरगिस (Nargis), दिलीप कुमार (Dilip Kumar), देव आनंद (Dev Anand) जैसे बड़े सितारों का इंटरव्यू लेने का मौका मिला करता था. एक दिन जब दिलीप कुमार का इंटरव्यू लेने शिकस्त फिल्म के सेट पर पहुंचे तो डायरेक्टर रमेश सहगल ने उनका स्क्रीन टेस्ट लेकर फिल्म ऑफर कर दी. 1955 की रेल्वे प्लेटफॉर्म से सुनील फिल्मों में आए. हालांकि सुनील की यह फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी. लेकिन इसके बाद बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री नरगिस के साथ सुनील दत्त को फिल्म मदर इंडिया में अहम रोल मिला. बस फिर क्या था, इसके बाद सुनील दत्त ने पीछे मुड़कर नहीं और मदर इंडिया सुपरहिट साबित हुई. इतना ही नहीं नरगिस और सुनील दत्त की मदर इंडिया भारत की पहली फिल्म बनी जिसे ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया.

 मदर इंडिया के सेट पर नरगिस और सुनील करीब आए. दोनों ने 1959 में शादी कर ली.फिल्मी दुनिया में अपना वर्चस्व फैलाने वाले सुनील दत्त ने अपने जीवन काल में राजनीति में भी अपना दमखम दिखाया. उस समय देश में मनमोहन सरकार के दौरान सुनील दत्त राज्यसभा सांसद भी रहे. इसके अलावा उन्हें इसी सरकार के तहत युवा और खेल विभाग के मंत्री पद का कार्यभार सौंपा गया. इस दौरान सुनील दत्त ने राजनीति में रहकर जरूरतमदों को काफी मदद की थी. 

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