आशा पारेख के इस संगीन आरोप ने शत्रुघ्न सिंहा को बना दिया स्टार

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ऐसे बने स्टार’ सीरिज में हम आपके सामने बॉलीवुड सितारों के संघर्ष और उनकी कामयाबी की अनसुनी कहानी पेश करते हैं. इस कड़ी में हम आज बात करेंगे बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा की .बिहार से आकर इंडस्ट्री में बगैर किसी गोडफादर के अपनी मुकम्मल जगह बना लेना एक चमत्कार ही तो था. लेकिन ये चमत्कार दिखाने के लिए सिन्हा को काफी पापड़ बेलने पड़े .तो आइये जानते हैं शत्रुघ्न सिन्हा के संघर्ष के बारे में …

शत्रुघ्न सिन्हा इसे अपनी शोहरत कहें या रुसवाई कि पुणे स्थित फिल्म इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का डिप्लोमा लेने के बाद मुंबई का रुख करने से पहले ही अपनी बददिमागी के लिए बॉलीवुड में मशहूर हो गए। इंस्टीट्यूट के साथियों के बीच उनकी छवि दबंग ,मुंहफट और बड़ी-बड़ी बातें करने वाले शख्स की थी। मुंबई आकर जब शत्रुघ्न सिन्हा ने अपना संघर्ष शुरू किया तो लोग उनके सांवले रंग और कटे चेहरे को देख उनका खूब मजाक उड़ाते .लेकिन सिन्हा अहंकारी होने की हद तक आत्मविश्वासी थे. उन्होंने इन तानों पर कोई ध्यान नहीं दिया और स्टूडियोज के चक्कर काटते रहे .

1967 में शत्रुघ्न सिन्हा को फिल्म ‘साजन’ में पहला ब्रेक मिला .इस फिल्म की हीरोइन आशा पारेख थी .शत्रु इस फिल्म में विलेन का किरदार निभा रहे थे .शत्रु उस समय फिल्मों में नए थे और फ़िल्मी तकनीक से वाकिफ नहीं थे. फिल्म के एक सीन में उन्हें आशा पारेख को जबरन अपनी बांहों में भरना था. सीन को रियलिस्टिक टच देने के लिए उन्होंने आशा पारेख को बुरी तरह जकड़ लिया .आशा पारेख इस जकड से बचने के लिए जितनी कोशिशें करती शत्रु उतनी ही जोर से उन्हें जकड लेते .शत्रु के इस बिहेव से आशा पारेख बुरी तरह घबरा गई और उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा पर मिसबिहेव करने का संगीन आरोप लगा दिया .आशा पारेख के इस इलज़ाम का नतीजा ये हुआ की शत्रु इंडस्ट्री में फेमस हो गए लेकिन नुक्सान ये हुआ की अभिनेत्रियाँ उनके साथ काम करने से कतराने लगी . ऐसे समय में मुमताज़ ने उन्हें सहारा दिया .उनकी ही सिफारिश पर उन्हें फिल्म ‘खिलौना’ में काम मिला .शत्रु इस फिल्म में विलेन बने थे .ये फिल्म सफल रही और शत्रु बतौर खलनायक स्थापित हो गए .लेकिन शत्रु के घर वाले शत्रु को परदे पर हीरो के हाथों पिटते देखने को तैयार नहीं थे. इसलिए उन्होंने हीरो बनने की ठानी .

सुभाष घई पुणे फिल्म INSTITUTE में सिन्हा के बैचमेट थे .उनके पास एक कहानी थी लेकिन उन्हें कोई प्रोड्यूसर नहीं मिल पा रहा था. शत्रु ने उनकी मुलाक़ात एन एन सिप्पी से करवाई .सिप्पी हालाँकि घई जैसे नए लोगों पर भरोसा करने को तैयार नहीं थे लेकिन उन्हें सिन्हा के स्टारडम पर भरोसा था इसलिए उन्होंने सिन्हा की सिफारिश पर इस फिल्म को प्रोड्यूस करने का फैसला किया .’कालीचरण 1976 में रिलीज हुई और हिट रही और इसके साथ ही शत्रुघ्न सिन्हा भी बतौर हीरो इंडस्ट्री में स्थापित हो गए .

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