Rajesh khanna (Part-10) : जानिए! कैसे राजेंद्र कुमार का लकी बंगला राजेश खन्ना की बर्बादी का कारण बना

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बता दें कि एक भुतहे बंगले ने राजेंद्र कुमार की तकदीर बदल कर रख दी. लेकिन जिस बंगले ने राजेंद्र कुमार को शोहरत के शिखर पर पहुंचा दिया वही बंगला राजेश खन्ना के लिए मनहूस साबित हुआ. आइए आपको बताते हैं ये बंगला आखिर खन्ना ने खरीदा कैसे..?

राजेश खन्ना को शांत समुद्र की गहराई काफी पसंद थी. स्टार बनते ही खन्ना समुद्र किनारे ऐसे बंगले की तलाश शुरू की जहां की छत से वो समुद्र को खाली पलों में निहार सकें. उन्हीं दिनों उन्हें पता चला की राजेंद्र कुमार अपना बंगला डिंपल को छोड़ अपने बड़े बंगले में शिफ्ट होनेवाले हैं. लेकिन राजेंद्र कुमार इस बंगले को बेचना नहीं चाहते थे. खन्ना को पता चला तो वो राजेंद्र कुमार के पीछे पड़ गए क्योंकि उन्होंने इस बंगले की काफी तारीफ़ सुन रखी थी. राजेश खन्ना को टालने के लिए राजेंद्र कुमार ने 60 हजार के बंगले की कीमत पांच लाख मांगी और खन्ना झट से तैयार भी हो गए.

राजेश खन्ना भले ही रकम देने को तैयार हो गए, लेकिन उस ज़माने में ये कोई छोटी-मोटी रकम नहीं थी. राजेश खन्ना ने कई निर्माताओं से पैसे मांगे फिर भी वो इतने पैसे जुटाने में सक्षम नहीं हुए. उन दिनों खन्ना की किस्मत उन पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी. साउथ के निर्माता चिनप्पा थेवर राजेश खन्ना को लेकर फिल्म बनाना चाहते थे. एक बिचौलिए के जरिये चिनप्पा खन्ना से मुलाक़ात करने में कामयाब रहे और अपनी फिल्म में काम करने के बदले उन्हें नौ लाख मेहनताने का ऑफर दिया था जो उस में ज़माने एक रिकॉर्ड था. इस तरह खन्ना ने बंगला खरीदकर उसका नाम ‘आशीर्वाद’ रखा और उसे एक आलीशान बंगले की शक्ल बख्शी.

अब इसे अंधविश्वास कहें या फिर कुछ और… इस बंगले में शिफ्ट होने से पहले खन्ना की ‘दो रास्ते’, ‘सच्चा झूठा’, ‘आन मिलो सजना’, ‘कटी पतंग’ और ‘आनंद’ सहित आठ फिल्में सुपरहिट साबित हुई थी. इस बंगले में शिफ्ट करने के एक साल के भीतर खन्ना की दस फिल्में रिलीज हुई, जिनमें से ‘दुश्मन’ और ‘बावर्ची’ को छोड़ सारी फिल्में फ्लॉप साबित हुई. जिससे खन्ना का आत्मविश्वास बुरी तरह हिल गया. यहीं से उनका करियर ढलान की ओर बढ़ने लगा.

कहा जाता है कि जिस बंगले के लिए राजेश खन्ना ने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च किया वही उनके लिए मनहूस साबित हुआ. करियर के ढलान पर राजेश खन्ना ने इस बंगले को बेचने की काफी कोशिशें की, लेकिन सफल नहीं हुए. उनकी बीमारी के दौरान दामाद अक्षय कुमार ने इस बंगले को खरीदने की पेशकश की थी, लेकिन तब राजेश खन्ना तैयार नहीं हुए. आखिरकार उनकी मौत के बाद पत्नी डिंपल कपाड़िया ने बंगले को बेच दिया.

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