पद्मावती ही नहीं ये फिल्मे भी फंस चुकी है विवादों में

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जिस तरीके से कई महीनों से फिल्म पद्मावती का राजनीतिक और कानूनी तरीके से खूनी रुप ले लिया था. अब माहौल बदल चुका है. संसद की गठित कमेटी और सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणी के बाद फिल्म निर्माता ने राहत की सांस ली है. बहराल जो भी हो अब फिल्म का सिनेमाघरों में कब प्रदर्शन होगा ये बाद की बात है. फिलहाल हम आपको बता दें कि बॉलीवुड फिल्मों का विवादों से बहुत पुराना रिश्ता रहा है, कभी बॉलीवुड फ़िल्में अपने टाइटल को लेकर तो कभी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचाने जैसे विवादों में फंसती रही हैं. विवाद की वजह सिर्फ यही नहीं है कईबार तो बाहर की फ़िल्मों से आइडिया या कहानी चुराने के आरोप अक्सर लगते रहे हैं.

वर्ष 2016 में निर्देशक करण जौहर की इस फिल्म ऐ दिल है मुश्किल को लेकर भारी बवाल हुआ। वजह थी इस फिल्म में पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान को लेना। उस वक्त भारत-पाकिस्तान के बीच काफी तनाव चल रहा था।

निर्देशक आशुतोष ग्रोवारीकर निर्देशन में वर्ष 2008 की फिल्म जोधा-अकबर को भी काफी विरोध झेलना पड़ा था। राजपूत करणी सेना ने इस फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। इस फिल्म को भी रिलीज नहीं करने के लिए काफी धमकिया मिली थीं।

वर्ष 2016 में अभिषेक चौबे की निर्देशित फिल्म उड़ता पंजाब अपने नाम और कहानी को लेकर यह फिल्म रिलीज से पहले ही काफी चर्चा में थी, फिल्म से पंजाब शब्द हटाने को लेकर काफी विवाद हुआ था।

साल 2013 में संजय लीला भंसाली के निर्देशन में रिलीज हुई फिल्म राम लीला भी अपने नाम को लेकर खूब सुर्खियों में रही। कई हिंदू संगठन ने इस फिल्म का नाम बदने की मांग को लेकर जमकर बवाल किया था।

फूलन देवी के जीवन पर आधारित वर्ष 1994 में शेखर कपूर के निर्देशन में रिलीज हुई फिल्म बैंडिट क्वीन जिसमे सीमा बिस्‍वास की सबसे पहली हिट फिल्‍म बैंडि क्‍वीन अपने बोल्‍ड दृश्‍यों और गाली गलौज से भरे संवादों के लिए बेहद विवादित रही। फिल्म का विरोध विशेष रूप से न्यूड सीन के चलते बहुत हुआ था।

वर्ष 1996 में दीपा मेहता के निर्देशन में रिलीज हुई फील फायर अपने सब्जेक्ट को लेकर विरोध का शिकार हुई। ये फिल्म लेस्बियन संबंधों को लेकर बनी थी। जिसे समाज के कई संगठन ने स्वीकार नहीं कर पाए।

वर्ष 2011 में प्रकाश झा के निर्देशन में आरक्षण के मुद्दे पर बनी इस आरक्षण फिल्म को लेकर भी काफी बवाल हुआ। प्रकाश झा की बहुचर्चित फिल्म राजनीति का मुद्दा बन गई थी। उत्तर प्रदेश, पंजाब और आंध्रप्रदेश में इस फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

वर्ष 2004 में अनुराग कश्यप के निर्देशन में राइटर एस हुसैन ज़ैदी की किताब पर बनी फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ जिसे सेंसर बोर्ड ने बैन किया था। फिल्म मुंबई में 1993 सीरियल बेम धमाकों की घटना पर आधारित थी.

राज कुमार हिरानी के निर्देशन में 2014 में रिलीज हुई फिल्म पीके में आमिर के न्यूड सीन और धार्मिक आस्थाओं की मान्यताओं को झुठलाने को लेकर खूब बवाल हुआ था। पीके के खिलाफ काफी संगठनों ने मिलकर विरोध प्रदर्शन भी किया था।

वर्ष 2010 में करन जौहर के निर्देशन में बानी फिल्म माय नेम इज खान में खान नाम को लेकर खूब बवाल हुआ। कहा जा रहा था कि फिल्म एक समुदाय को टारगेट कर रही है। बाद में सभी को ये फिल्म काफी पसंद आई थी।

वर्ष 2016 में रितिक रोशन की फ़िल्म मोहेंजो-दाड़ो रिलीज़ हुई थी, जिसे आशुतोष गोवारिकर ने डायरेक्ट किया था। राइटर अक्षयादित्य लामा ने फ़िल्म की रिलीज़ से पहले आशुतोष पर उनकी कहानी चुराने का आरोप लगाया था। लामा ने मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर करके फ़िल्म की रिलीज़ रोकने की भी मांग की थी, मगर उच्च न्यायालय ने रिलीज़ रोकने से इंकार कर दिया।

वर्ष 2012 में आई भट्टे कैंप की फ़िल्म जन्नत 2 कॉपीराइट उल्लंघन के मामले में तब फंसी, जब राइटर कपिल चोपड़ा ने कहानी चुराने का आरोप लगाया था। इस मामले में विशेष फ़िल्म्स को कथित तौर पर 20 लाख रुपए मुआवज़े के साथ क्रेडिट्स में कपिल का नाम देना पड़ा था।

शाहरुख़ ख़ान की 2011 में आई सुपरहीरो फ़िल्म रा.वन चोरी के आरोप में फंस चुकी है। टेलीविज़न प्रोड्यूसर और राइटर यश पटनायक ने दावा किया था कि फ़िल्म उनके आइडिया पर बनी है। इसको लेकर वो मुंबई हाई कोर्ट गए थे। अदालत ने कॉपीराइट उल्लंघन के लिए इस मामले में 1 करोड़ रुपए पटनायक को देने के निर्देश दिए थे। इस फ़िल्म को अनुभव सिन्हा ने डायरेक्ट किया था।

फराह ख़ान के निर्देशन में वर्ष 2007 में आई शाहरुख़ खान की फ़िल्म ओम शांति ओम कॉपीराइट विवाद में फंसी थी। 2008 में अजय मोंगा नाम के एक राइटर ने शाहरुख़ की कंपनी पर उनकी कहानी चुराने का आरोप लगाया था। दावा किया गया था कि ओम शांति ओम उनकी द साइलेंट मूवी नाम की स्क्रिप्ट पर आधारित है, जो मोंगा ने रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट समेत कई प्रोडक्शन हाउसेज को भेजा था।

जून 2017 में दिनेश विजान के निर्देशन में बनी फिल्म राब्ता कॉपीराइट कंट्रोवर्सी का शिकार हुई थी। राब्ता का ट्रेलर आने के बाद तेलुगु हिट मगधीरा के मेकर्स ने चोरी का आरोप लगते हुए प्रोड्यूसर्स को क़ानूनी नोटिस भी भेजा था।

साल 2001 में आई निर्देशक अनिल शर्मा की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गदर एक प्रेम कथा’ में एक हिंदू लड़के और मुस्लिम लड़की के प्यार को दिखाया गया है. भारत के बंटवारे के समय सकीना (अमीषा पटेल) अपने परिवार से बिछड़ जाती है. सिख धर्म के लोग उसे परेशान करते हैं तो तारा (सनी देओल) सकीना की मांग में सिंदूर लगा कर पत्नी बना लेता है. इसका विरोध मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जमकर किया. मुंबई, अहमदाबाद और भोपाल में तो फिल्म सिनेमाघरों से हटाने के लिए तोड़-फोड़ भी हुई लेकिन फिल्म की कमाई और पॉपुलैरिटी पर इसका कोई असर नहीं हुआ.


साल 2012 में आई निर्देशक उमेश शुक्ला की फिल्म ओह माई गॉड (ओएमजी) भी विवादों में फंसी थी. फिल्म में हिंदु धर्म की सच्चाई को बहुत अच्छे तरीके से दिखाया गया लेकिन धर्म के नाम पर धंधा करने वालों को ये गवारा नहीं हुई. फिल्म के निर्माता-निर्देशक और स्टारकास्ट अक्षय कुमार और परेश रावल के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी गयी. कुछ जगहों पर फिल्म को रिलीज नहीं किया गया लेकिन फिर भी फिल्म रिलीज हुई और लोगों को पसंद भी आई.

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