नवाज़ संभालेंगे बालासाहेब ठाकरे की कुर्सी.. देखिये पहला टीजर….! BOLLYWOOD AAJKAL

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नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अपने करियर के सबसे बेहतरीन दौर से गुजर रहे हैं. इन दिनों नवाज़ हर तरह की भूमिकाओं के लिए निर्देशकों की पहली पसंद बन चुके हैं. नवाज़ आगामी बायोपिक ‘ठाकरे’ में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की भूमिका निभाते दिखाई देंगे. बाला साहब ठाकरे पर बनी फिल्म ‘ठाकरे’ में मुख्य निभाने को लेकर नवाज़ का कहना है कि ये उनके लिए बेहद भावुक क्षण है, जिसे व्यक्त करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं.
फिल्म के टीजर लॉन्च के मौके पर नवाजुद्दीन ने कहा, “आज का दिन मेरे लिए बेहद अहम है, क्योंकि आज हमारी फिल्म का टीजर रिलीज हो रहा है. मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे इस फिल्म में ऐसी महान शख्सियत का रोल निभाने का मौका मिला है, जिसे दुनिया का कोई भी कलाकार निभाना पसंद करेगा. क्योंकि बालासाहब ठाकरे जी का व्यक्तित्व ही ऐसा था. मैं इस भरोसे के लिए माननीय श्री उद्धव ठाकरे, संजय राउत, फिल्म के निर्देशक अभिजीत जी का धन्यवाद करता हूं. मुझे पूरा भरोसा है हम इस बायॉग्रफी को बहुत आगे तक लेकर जाएंगे. मुझे इस बात की भी खुशी है कि हमारी फिल्म का टीजर महानायक अमिताभ बच्चन जी के हाथों रिलीज़ हुआ है.”
नवाज़ ने इसके आगे की बातचीत मराठी भाषा में करते हुए लोगों के दिल-दिमाग में उठ रहे मराठी भाषा को बोल पाने की शंका को ख़त्म करते हुए कहा,”सभी के मन में यह सवाल होगा कि अरे यह मराठी कैसे बोल पाएगा. मैं उन सभी लोगों को कहना चाहता हूं मुझे बालासाहब ठाकरे जी प्रेरणा और आशीर्वाद दे रहे हैं. सभी को मेरा नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत…!”इस मौके पर ख़ास तौर पर मौजूद अमिताभ बच्चन ने कहा,”मेरे लिए यह मौका बहुत खास है, बालासाहब ठाकरे जी के साथ मेरा बेहद निजी और पारिवारिक संबध रहा है. उनका कोई भी कार्यक्रम होता था तो वह मुझे बुलाते थे और मैं जाता था. आज तो मुझे यहां आना ही था क्योंकि यह कार्यक्रम बालासाहब जी का है. संजय राउत की कलम तलवार की तरह चलती है, इसलिए मुझे उनसे डर लगता है. संजय जी से मेरा अनुरोध है कि इस फिल्म को सिर्फ तीन घंटे की न बनाएं, क्योंकि बालासाहब के पूरे व्यक्तित्व को मात्र तीन घंटे में नहीं दिखाया जा सकता है इसलिए आपसे मेरी प्रार्थना है कि इस फिल्म को और समय दें.”बिग बी आगे कहते हैं कि, “बालासाहब के साथ मेरा पारिवारिक संबंध रहा क्योंकि जिस दिन से मैं उनसे मिला न जाने क्यों उनको लगा कि मैं उनके परिवार का एक सदस्य हूं, यह प्यार उनकी उदारता और बड़प्पन था. लगभग चालीस साल पहले जब मैं उनसे पहली बार मिला तो उन्हीं दिनों मेरा विवाह हुआ था तो उन्होंने मुझे फोन किया कि तुम्हारा विवाह हो गया है मैं तुम्हारी पत्नी से मिलना चाहता हूं, तुम घर आओ तो मैं उनके घर मातोश्री गया. घर में आई ने जिस तरह जया का स्वागत किया वह स्वागत ऐसा था जैसे वह अपनी बहु का सम्मान कर रही हों. उसी दिन मैंने तय कर लिया कि बालासाहब मेरे लिए पिता समान हैं और मेरा संबंध इनके साथ हमेशा रहेगा. बातें तो बहुत सी हैं लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जो शायद किसी को पता भी न हों.
साल 1982 में जब मैं फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान घायल हुआ तो कुछ दिन तो मैं बेंगलुरु में बेहोश रहा लेकिन जब यह तय हुआ कि अब मुझे बेहोशी की ही हालत में मुंबई शिफ्ट किया जाएगा. तो हवाई जहाज में मुझे मुंबई भेजने के लिए रखा गया, उस दिन बहुत बारिश भी हो रही थी. मुझे हवाई अड्डे से सीधा ब्रीज कैंडी अस्पताल ले जाना था लेकिन उस समय भारी बारिश की वजह से कोई भी एम्बुलेंस नहीं आ रही थी तब मुझे बालासाहब की शिवसेना की एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया था. अगर उस दिन सही समय पर एम्बुलेंस नहीं आती तो मेरी अवस्था और ज्यादा खराब हो जाती.


ऐसी ही और भी घटनाएं है… जब मेरे ऊपर कई बार आरोप लगाया जाता तब बालासाहब मुझे फोन करते और पूछते यह सब क्या सुन रहा हूं, क्या यह सच है, घर आओ मैं बात करना चाहता हूं तुमसे,. ऐसा ही एक आरोप जब लगा तो उन्होंने मुझे पूरे परिवार के साथ अपने घर बुलाया मुझे पूछा अब बताओ क्या यह सच है, मैंने कहा इस आरोप में कोई सच्चाई नहीं है, तब बालासाहब ने मुझे कहा अब बिल्कुल भी घबराने की जरुरत नहीं है. अभी बाहर बहुत तूफान चल रहा है जब यह तूफान रुक जाएगा तब अपनी बात कहने के लिए बाहर जाना तब मैं तुम्हारे साथ खड़ा रहूंगा. उस समय जब कोई मेरे साथ नहीं था तब बालासाहब का यह साहस देना बहुत बड़ी बात थी..”

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