इस Director के बुलाने पर आधी रात अकेले गेस्ट हाउस पहुँची Madhuri Dixit,सुबह होते ही बदल गई तकदीर

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माधुरी दीक्षित ने अपने लम्बे फिल्मी सफर के दौरान ऐसे कई कारनामे किये जो वाकई हंगामेदार थे लेकिन उनकी सफलता का दायरा इतना बड़ा था कि उनके ऐसे कारनामे सामने नहीं आ सके। हम अपनी नई सीरीज ‘माधुरी के लफड़े’ में ऐक्ट्रेस से जुड़े कुछ ऐसे राज आपके सामने ला रहे हैं जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। शुरुआत करते हैं माधुरी और उनके मेंटॉर सुभाष घई के love-cum-hate story से

सुभाष घई से संपर्क होने से पहले भी माधुरी दीक्षित फिल्मों में काम कर रही थी लेकिन उनके क्रेडिट में सारी फ्लॉप फ़िल्में ही जुडी थी। माधुरी का करियर वास्तव में तब शुरू हुआ जब वो सुभाष घई की फिल्म से रीलॉन्च हुई। सुभाष घई ही वो निर्देशक थे जिनकी वजह से लोग माधुरी दीक्षित को पहचानने लगे थे। बता दें कि माधुरी दीक्षित कि सुभाष घई से पहली मुलाकात कश्मीर में हुई थी। 1985 में घई फिल्म ‘कर्मा’ की शूटिंग कर रहे थे। बगल के सेट पर माधुरी की फिल्म ‘आवारा बाप’ की शूटिंग चल रही थी. इस फिल्म के निर्देशक सोहन लाल कँवर पर माधुरी का जादू इस कदर छाया हुआ था कि वो सुभाष घई के पास जाकर माधुरी की तारीफों के पुल बाँधने लगे जिसके बाद घई ने माधुरी से मिलने की इच्छा व्यक्त की। माधुरी से मिलने के बाद घई उनकी डांसिंग स्किल से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने माधुरी को ‘कर्मा’ में एक आइटम सॉन्ग का ऑफर दे दिया। डांस शूट भी हुआ लेकिन एडिटिंग के बाद इस गाने को फिल्म से हटा दिया गया।
जिससे माधुरी काफी मायूस हो गयी। माधुरी की निराशा को देखते घई ने उन्हें अपनी फिल्म में लेने का वादा किया। घई ने अपना वादा निभाया भी लेकिन सुभाष घई की फिल्म की हीरोइन बनने के लिए माधुरी दीक्षित को जो कीमत चुकानी पडी उसकी टीस आज भी उनके दिल में मौजूद है। यही वजह है कि माधुरी और सुभाष घई के रिश्ते काफी बिगड़े हुए हैं. आखिर क्या थी कीमत इसके बारे में हम आपको अगले एपिसोड में बताएंगे।

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