जब Jeetendra को उनके ही बैनर की फिल्म से निकालने की जिद्द पर अड़ गया ये निर्देशक

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अभिनेता जीतेंद्र ने बॉलीवुड में काफी लम्बी पारी खेली है और कई हिट फ़िल्में भी दी हैं लेकिन आज तक कोई भी उन्हें बढ़िया एक्टर मानने को तैयार नहीं है .एक्टिंग की जीरो स्किल के बावजूद दर्शकों के बीच उनका खासा क्रेज था इसलिए उनके पास काम की कभी कोई कमी नहीं रही .लेकिन एक बार ऐसा हुआ कि उनके अपने ही बैनर तले बन रही फिल्म में निर्देशक ने उन्हें एक्टिंग ना कर पाने के कारण फिल्म छोड़ने की सलाह दे डाली और जब जीतेंद्र ने फिल्म नहीं छोडी तो निर्देशक ने ही अपने आपको इस फिल्म से अलग कर लिया .कौन सी थी ये फिल्म और क्या था माजरा ? आइये जानते हैं..

साल 1982 में जीतेंद्र ने अपने भाई प्रसन्न कपूर को निर्माता बना कर फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा .इस फिल्म के लिए उन्होंने ऋषि कपूर ,रेखा और टीना मुनीम जैसे कलाकारों को साइन किया और निर्देशक के रूप में एच एस रवैल जो उन दिनों फिल्म ‘लैला मजनू’ की धमाकेदार कामयाबी के कारण सुर्ख़ियों में थे साइन किये गए .एच एस रवैल अपनी सख्त मिजाजी के लिए काफी मशहूर थे .अगर कोई कलाकार शूटिंग के दौरान रीटेक करता तो रवैल काफी नाराज हो जाते .खैर.. जब फिल्म की शूटिंग शुरू तो जीत्नेद्र भी सीन में बार-बार रीटेक करने लगे .रवैल को मनमाफिक शॉट मिल नहीं पा रहा था जबकि बार-बार रीटेक के कारण जीतेंद्र बुरी तरह नर्वस हो चुके थे .तंग आकर जीतेंद्र ने रवैल से कहा कि उनमें से ही कोई टेक फायनल कर वो फिल्म की शूटिंग को आगे बढाएं लेकिन रवैल ने इससे साफ़ इंकार कर दिया .रवैल का कहना था कि भले ही जीतेंद्र फिल्म के निर्माता हैं लेकिन इस फिल्म से उनका रेपुटेशन भी जुड़ा हुआ है .अगर जीतेंद्र एक्टिंग नहीं कर पा रहे तो बेहतर है कि वो फिल्म में अपनी जगह किसी और एक्टर को मौक़ा दें .भला ये बात जीतेंद्र कैसे मानते .
काफी दिन इसी खींचातानी में निकल गए .जीतेंद्र ने जब देखा कि रवैल जिद्द पर अड़े हुए हैं तो उन्होंने फिल्म से उन्हें निकाल कर किसी दूसरे निर्देशक को मौक़ा देने का फैसला किया .रवैल ऋषि कपूर के पसंदीदा निर्देशक थे और उनके लिए कई हिट फ़िल्में बना चुके थे इसलिए उन्होंने जीतेंद्र की इस बात पर एतराज जताया .इन सब बातों ने मिलकर फिल्म को लटका दिया .आखिरकार जीतेंद्र ने रवैल को फिल्म से बाहर कर उनकी जगह किसी और से फिल्म पूरी करवा ली. लेकिन बतौर निर्माता ये जीतेंद्र की सबसे बड़ी भूल साबित हुई .ये फिल्म उस साल की सबसे बड़ी फ्लॉप साबित हुई और जीतेंद्र भारी क़र्ज़ में डूब गए . इस क़र्ज़ से बाहर निकलने के लिए उन्होंने साउथ का रास्ता पकड़ा और कई साउथ इन्डियन निर्माताओं की हिन्दी फिल्मों में काम किया .

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