टांग उठा के नाच लेने से कोई गोविंदा नहीं बन सकता..! BOLLYWOOD AAJKAL

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अभिनेता गोविंदा से ज्यादा वर्सेटाइल एक्टर शायद ही बॉलीवुड को नसीब हुआ हो. डांस, एक्शन, कॉमेडी.. चाहे जहां भी फिट कर दो गोविंदा अपने आप में अपनी मिसाल खुद ही हैं. यही वजह है कि आज के एक्टर खुद को गोविंदा से आइडेंटिफाई करना ज्यादा पसंद करते हैं. लेकिन खुद गोविंदा का मानना है कि,”गोविंदा बनने के लिए साधना करनी पड़ेगी और लंबा संघर्ष करना होगा. क्योंकि गोविंदा एक एक्टर नहीं बल्कि एक नजीर है उनके लिए जिन्हें अपने बूते कामयाब होने की कीमत चुकानी पड़ती है.”

कभी फिल्मों की कामयाबी के लिए गोविंदा का नाम ही काफी होता था, लेकिन अब खुद गोविंदा को अपनी फिल्म रिलीज करने के लिए लोगों की चिरौरी करनी पड़ती है. इस मामले में गोविंदा का मानना है कि,”बॉलीवुड ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र में चढ़ते सूरज को सलाम किया जाता है. मुझे नहीं लगता इसमें कुछ गलत है. लेकिन मैं ऐसी चीजों पर ध्यान नहीं देता, मैं यही सोचता हूं कि मैं क्या कर सकता हूं, मेरा समय कैसा चल रहा है, मैं किस तरह इससे निकल सकता हूं..?” गोविंदा के मुताबिक,”आज के समय में प्लानिंग और मार्केटिंग की वजह से फिल्म मेकिंग काफी मुश्किल हो गया है, लेकिन अब जरूरी हो गया है कि आप अपनी सोच लोगों के समक्ष रखें.”

आज के सितारों में वरुण धवन गोविंदा के विकल्प के रूप में देखे जाते हैं. लेकिन खुद गोविंदा का मानना है कि,”मुझसे वरूण धवन की तुलना करना पूरी तरह से गलत है. जब रणवीर सिंह आया, तो लोगों ने कहा गोविंदा है.. जब वरूण आया, तो लोगों ने कहा गोविंदा है. आप खुद ही देखो, इन दोनों की बॉडी तो सलमान जैसी है. लेकिन किसी की हिम्मत है जो इन्हें सलमान कह सकें.. नहीं.., क्योंकि इन्हें पता है कि यदि गलती से भी कोई इन्हें सलमान जैसे कह देगा, तो अगले दिन से इंडस्ट्री में इन्हें जगह नहीं मिलेगी.

टांग उठाकर नाच लेने से कोई गोविंदा नहीं बन सकता और जहां तक वरूण की बात है तो वह कभी गोविंदा हो ही नहीं सकता, क्योंकि वह एक डायरेक्टर का बेटा है. गोविंदा का बैकग्राउंड नहीं था. वह गांव से आया एक अनपढ़ और मासूम-सा लड़का था. वरुण में वो मासूमियत नहीं है, ऐसे लोग तो बिना सोचे-समझे एक शब्द नहीं बोलते. वरुण को गोविंदा बनने के लिए पहले अपने बाप डेविड के साथ काम करना पड़ेगा. वरुण ने 6 साल में डेविड धवन के साथ दो फिल्में की हैं. मैं डेविड के साथ 17 फिल्में कर चूका हूं.

गोविंदा का कहना है कि,”मैं कभी कैलकुलेटिव नहीं रहा. मैं बस अपना काम काम करता हूं. कुछ गलतियां मैंने की जिसकी खामियाजा मुझे भुगतना पड़ा. मसलन यदि मैं अभी पॉलिटिक्स में रहता तो शायद मुझसे भी कोई किसी की तुलना नहीं करता. लेकिन यह तो फिल्मी लाइन का रिवाज है. यहां आप थोड़े पीछे हुए या फिर किसी का टाइम खराब हुआ और उसकी जगह थोड़ी-सी भी खाली हुई तो लोग वहां किसी को भी फिट कर देते हैं.”

बॉलीवुड में कैंप की बात तो सभी करते हैं, लेकिन इसपर कोई खुलकर कहने की हिम्मत नहीं करता. लेकिन गोविंदा मानते हैं कि यहां ग्रुपिज्म तो है ही. आज जिस तरह खान्स कैंप है, अक्षय कुमार कैंप है, उसी तरह 90s में गोविंदा कैंप हुआ करता था. सब यही कहते थे कि गोविंदा, डेविड धवन, शक्ति कपूर, करिश्मा कपूर, रवीना टंडन गोविंद कैंप है और ये लोग ही मिलकर फिल्म बना लेते है, किसी और को मौका ही नहीं देते. आज करण जौहर कैंप के मठाधीश बने हुए हैं.

कभी गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी की गारंटी मानी जाती थी, लेकिन आज गोविंदा सबसे ज्यादा मायूस डेविड से ही हैं. उनके मुताबिक,”मैंने डेविड धवन के साथ 17 फिल्में की हैं. मैंने उनसे 18वीं फिल्म के लिए भी बात की थी. तो उन्होंने उस दौरान मेरी कहानी, मेरा टाइटल ‘चश्मेबद्दूर’ तो ले लिया, लेकिन फिल्म में उन्होंने मेरी जगह ऋषि कपूर को ले लिया. फिर भी मैंने उनसे कहा,”अपने मेरी कहानी पर फिल्म तो बना ली, कम-से-कम मेरा एक कैमियो ही डाल दो. डेविड ने मुझसे शूट तो करवाया पर ना जाने क्या सोचकर वह भी हटा दिया और मेरे साथ 18वीं फिल्म करने के लिए तैयार नहीं हुए.”

बहरहाल कॉमडी किंग गोविंदा अब अपने ही हालात पर विवशता भरी हंसी हंसने को मजबूर हैं. गोविंदा की ख्वाहिश है कि उन्हें रोहित शेट्टी के साथ काम करने का मौका मिले तो शायद बात बन जाए. गोविंदा के मुताबिक,”रोहित अपनी फिल्मों में खुद बहुत तैयारी के साथ आते हैं. जिससे उनकी फिल्मों में एक्टर्स को ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ता. अक्सर फिल्में डायलॉग के पंच लाइन से चलती है, जो कि डाइरेक्टर का काम होता है. हमारे समय की फिल्मों में हमलोग ही कॉमेडी निकालकर लाते थे.”

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