Happy Diwali : बॉलीवुड के बम, पटाखे और फुलझड़ियां

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दीवाली के मौसम में हर तरफ पटाखों की धूम है. राजनैतिक गलियारों में मोदी बम और पाकिस्तानी पटाखों का शोर कुछ ज्यादा ही प्रदूषण फैला रहा है. ऐसे में भला बारूद की खान बॉलीवुड को कैसे भूला जा सकता है. बॉलीवुड में पटाखों की कई किस्में मौजूद हैं, जिन्हें साइज, लंबाई और हैसियत के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकता है. पेश है बॉलीवुड आजकल की एक ख़ास पेशकाश..

बॉलीवुड के असली पटाखे
वैसे तो बॉलीवुड में पटाखों की कमी नहीं लेकिन अनुष्का शर्मा और श्रुति हसन ‘पटाखा ऑफ बॉलीवुड’ के ताज की हकदार मानी जा सकती है. अनुष्का शर्मा में वो सभी खूबियां मौजूद हैं, जिसकी वजह से चलती-फिरती लड़कियां पटाखा विशेषण की हकदार हो जाती है. बॉक्स ऑफिस पर भी बराबर फूटने वाली अनुष्का शुद्ध रूप से पंजाबी बारूद का उत्कृष्ट नमूना जिसे हर दर्शक नजदीक से फूटते हुए देखने की ख्वाहिश रखता है. इसके अलावा श्रुति हसन में भी कम शोर नहीं लेकिन फिल्मेकर्स अभी तक इस पटाखे का पलीता ही नहीं ढूंढ पाए हैं. अब कहीं से भी आग लगा देने से पटाखा अपनी कुव्वत के हिसाब से तो नहीं फट सकता. श्रुति हसन का पूरा दम-ख़म देखने के लिए उन्हें बड़े बैनर और महेश भट्ट जैसे निर्देशक की जरूरत है. कंगना राणावत में काफी बारूद भरा हुआ है जिसका विस्फोट जितना दूसरों को घायल करता है उससे ज्यादा खुद कंगना का दामन ही जल जाता है. ऐसा लगता है कंगना ने अपना बारूद कड़ी धूप में सुखाया है जो माचिस देखते ही पूरी आवाज के साथ फट पड़ता है. तमन्ना भाटिया भले ही अब तक बॉक्स ऑफिस पर फुसफुसिया पटाखा ही साबित होती रही है लेकिन इस पटाखे का जोर देखना हो तो साउथ इंडियन आँखें लगाने की जरूरत पड़ेगी. जहाँ तमन्ना की तमन्ना अंधों ने भी पाल रखी है. तमन्ना को अभी और मौके मिलने चाहिए,आज के यंग जेनेरेशन में श्रद्धा कपूर को जोरदार पटाखा माना जा सकता है. भले ही श्रद्धा की उत्पत्ति ‘आउ’ प्रदेश से हुई है, लेकिन इस पटाखे में एक दिन परमाणु बम बन जाने की क्षमता मौजूद है. लोडेड गन करीना कपूर और हॉलीवुड में लेमनचूस बनी प्रियंका चोपड़ा में भले ही अब वो बात नहीं रही लेकिन अगर ठीक से माचिस की तीली लगाई जाए इस मुरझाए पटाखों में अब भी काफी जान बाकी है. दीपिका पादुकोण का दिल इतनी बार फुट चूका है कि ये पटाखा अब काम का कम सजावटी ज्यादा लगता है, बेहतर है इस पटाखे को फ्रेम में ही रहने दें. लंबी टांगों वाली पलीता कहाँ बुझ जाए कहना मुश्किल है।

बॉलीवुड की फुलझड़ियां
बिलाशक आलिया भट्ट बॉलीवुड की फूलझड़ी नंबर 1 है, जिसकी रोशनी को देखकर हम केवल ताली बजा सकते हैं. भले ही दिल के अरमानों में उबाल ना आए लेकिन चिंगारी तो जग ही जाती है. एवलिन शर्मा को कई बार माचिस लगाओ तभी सुलगती है वरना सुस्त पड़ी रहती है. लेकिन जब जलती है तो खूब लाईट मारती है. अदा शर्मा की अदा बस बिकनी में ही ठीक ठाक लगती है. वैसे अदा बॉलीवुड की फुलझड़ी की दौर में शामिल हो सकती है. दिशा पटानी बॉलीवुड की नयी सनसनी है. अगर दिशा फटने की दिशा में नहीं बढ़ी तो इस फुलझड़ी में सुलग उठने के पूरे गुण मौजूद हैं. एमी जैक्शन इम्पॉर्टेट फुलझड़ी है. चायनीज आइटम की तरह इस फुलझड़ी की किरणों का लुत्फ़ उठाया जा सकता है. अदिति राव हैदरी के सुस्त करियर के कारण उन्हें फुलझड़ी की श्रेणी में रखा गया है वरना जिस्मानी तौर पर ये पटाखा भारत-पाक सीमा पर काफी कारगर साबित हो सकता है.

रॉकेट्स ऑफ़ बॉलीवुड
रॉकेट्स पटाखों का स्टैंड लंबा होता है और उसमें बारूद थोड़ा. लेकिन आग लगते ही वो उड़ता काफी ऊपर है और दिशाहीन होकर गिर जाता है. इंसानी रूप में नरगिस फाखरी से बेहतर रॉकेट बॉलीवुड में कहाँ मिलेगा. शुरुआती कुछ फिल्मों से रॉकेट की तरह उड़ने वाली नरगिस अब किधर जा रही हैं इसे जानने के लिए रॉकेट साइंस की जरूरत तो बिलकुल नहीं हैं. बॉलीवुड की चायनीज आइटम मानी जाने वाली जैकलीन फर्नांडिस का हाल भी कमोबेश ऐसा ही है. माचिस लगते ही जैकलीन कभी साजिद खान तो कभी सलमान खान के घर में जा घुसती है. कीर्ति सेनन के नायकों को उनके साथ किसिंग सीन के लिए शायद सीढ़ियों की जरूरत पड़ती होगी. इस रॉकेट में साइंस तो है लेकिन जरा इनका मैथमैटिक्स सही नहीं बैठ रहा. सोनम कपूर में रॉकेट के हिसाब से कुछ ज्यादा ही बारूद भर दिया गया लगता है. लेकिन इस रॉकेट का पलीता ही भींगा हुआ है. इसलिए कोई उन्हें सुलगाने को ही तैयार नहीं. वाणी कपूर जरूर अपनी किसिंग बारूद के कारण लोगों की ख्वाहिशों में घुसती जा रही है.

बम्स ऑफ़ बॉलीवुड
बम तो बम ही होता है। जितनी आसानी से जलेगा उतनी ही जोर से फटेगा। बॉलीवुड में जिस्मानी तौर पर कई चलते-फिरते बम मौजूद हैं.सोनाक्षी सिन्हा बम का सही उदहारण हैं। जिस्मानी और कामयाबी दोनों नजरिये से उन्हें “बम ऑफ बॉलीवुड” माना जा सकता है। ज़रीन खान अगर थोड़ी-बहुत कामयाब होती तो उन्हें एटम बम मानने से भी किसी को गुरेज नहीं होता.लेकिन जब ये फुसफुसी बम फूटती है तो धमाका (हेट स्टोरी-3 ) बड़ा जोरदार होता है। परिणीति चोपड़ा को अगर किसी को बम मानने से परहेज है तो उन्हें सुतली बम का खिताब तो दिया ही जा सकता है। लेकिन इस बम से अब थोड़ा बारूद निकल चुका है। हुमा कुरैशी बॉलीवुड की बॉक्स बम है। लेकिन कमबख्त इस बम को जल्दी कोई फोड़ने को तैयार ही नहीं होता। शायद इसका हेवीनेस ही माइनस पॉइंट साबित हो रहा है। क्योंकि जब ये बम फटता है तो धमाका बदलापुर तक सुनाई देता है। भला कौन इसे सुलगाकर अपना कान फोड़े। ऋचा चड्ढा आजकल बिना सुलगाये ही फूट जाती है और धमाका कर देती है। ये ऐसा बम है जो खुद ही फूटने को तैयार बैठी रहती है। सुष्मिता सेन का बारूद हालांकि अब आउटडेटेड हो गया है लेकिन अब भी इस बम में बड़ा धमाका करने की कुव्वत है।

एटम बम ऑफ बॉलीवुड
हिंदुस्तान के पास भले ही कई एटम और परमाणु बम हों लेकिन बॉलीवुड में आजतक केवल एक ही तैयार कर पाया वो है सनी लियोनी. एटम बम की तरह ही खतरनाक सनी लियोनी जब फूटती है तो लोग कंबल में छुप-छुप कर नजारा लेते हैं. इस एटमबम से हर कोई घायल हो जाने को तैयार रहता है. कमाल है यार…

एक्सपायरी डेट वाले पटाखे
बॉलीवुड में कुछ ऐसे पटाखे भी मौजूद हैं जो हर साल मार्केट में उतरने की जिद्द ठाने बैठे हैं. किस्मत से कोई इन्हें खरीद कर सुलगा भी दे ये बस फुस्स्स ही साबित होते हैं. ऐश्वर्या रॉय को लगता है कि उनका बारूद कभी सूख ही नहीं सकता और करन जौहर टाइप लोग उनकी बातों पर यकीन भी कर लेते हैं. बासी पटाखे का जलवा अभी-अभी बॉक्स ऑफिस पर सेल के लिए उतरा है. देखते हैं इनके खरीदारों को कितना फायदा होता है. काजोल तो पहले से ही बुझी हुई थी. उन्हें तो केवल शाहरुख खान माचिस से ही सुलगाया जा सकता है. अमीषा पटेल बाथरूम में भींग-भींग कर सुलगने की कोशिश कर रही है. हाल ही में उन्होंने ऐसी कोशिश की थी लेकिन पब्लिक ने इस पटाखे को कचड़े में डाल दिया. शिल्पा शेट्टी मन मसोस कर छोटे परदे में घुसी हुई है और रो-धो कर अपने पिछले रिकॉर्ड का गम भुला रही है. विद्या बालन डर्टी तरीके से एक बार ही फूटी और अपने ही धमाके में गुम हो गयी. ये पटाखे भले ही अब एक्सपायर हो चुके हैं लेकिन खंडहर कहता है कि इमारत कभी शानदार थी….

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