खुद को स्टार नहीं एक्टर समझती हैं हुमा कुरैशी

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हुमा कुरैशी बॉलीवुड की उन गिनी-चुनी अभिनेत्रियों में से है जो परफॉर्मेंस ओरिएंटेड रोल्स के लिए फिल्ममेकर्स की पहली पसंद होती हैं. यही वजह है कि उन्हें बॉलीवुड की संभावित स्मिता पाटिल भी कहा जाता है. 2012 में फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से अपनी शुरुआत करने वाली हुमा कुरैशी ने कई बार अपनी इस इमेज से बाहर निकलने की कोशिश भी की लेकिन ‘बदलापुर’ और ‘डेढ़ इश्किया’ जैसी फिल्मों में लीक छोड़ने की उनकी कोशिश कामयाब साबित नहीं हुई. फिलहाल हुमा अपनी इमेज और सिनेमा की मौजूदा जरूरतों के बीच तालमेल बिठाने की जद्दोजेहद में जुटी हुई है.
28 जुलाई 1 9 8 6 को दिल्ली में जन्मी हुमा एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती हैं जहां एक्टिंग दिवास्वप्न से ज्यादा मायने नहीं रखती लेकिन हुमा कुरैशी ने अपनी इस जिद्द को हकीकत का रूप देने के लिए पहले थियेटर का रास्ता अपनाया और मॉडलिंग के जरिए बॉलीवुड में दाखिल हो गयी.

शुरुआत में उन्हें आमिर खान और शाहरुख़ खान जैसे बड़े सितारों के साथ मॉडलिंग करने का मौक़ा जरूर मिला लेकिन उनकी फ़िल्मी हसरत थियेटर के जरिये ही पूरी हुई. अनुराग कश्यप ने उन्हें एक प्ले के दौरान देखा और एक साथ तीन फिल्मों के लिए साइन कर लिया. गैंग ऑफ वासेपुर में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ उनकी जोड़ी बॉलीवुड के लिए एक ताजी हवा के झोंके की तरह ही थी. ऐसी एक्ट्रेस जिसमें ग्लैमर और टैलेंट का अद्भुत मिश्रण था. पहली फिल्म की कामयाबी ने उनके पाँव जमा दिए लेकिन विडंबना ये रही कि उन्होंने बाद की फ़िल्में जैसे एक थी डायन,लव शव दे चिकन खुराना और तृष्णा में खुद को दोहराना शुरू कर दिया. हुमा जल्द ही अपनी इमेज की सीमाओं को समझ गयी और बदलापुर ,डेढ़ इश्किया जैसी फिल्मों के जरिये इससे बाहर निकलने की कोशिश करती नज़र आयी. पिछले साल आई अक्षय कुमार की फिल्म ‘जॉली एल एल बी -2 ‘ को हुमा की एक कामयाब कोशिश मानी जा सकती है.

बहरहाल हुमा कुरैशी अब बॉलीवुड की सीमाओं से निकल कर हॉलीवुड की चौखट पर जा पहुँची है. हुमा गुरिंदर चढ्ढा भारत-पाकिस्तान विभाजन पर बनी फिल्म ‘‘वायसरायज हाउस’’ के साथ अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा में पदार्पण कर रही है. इस फिल्म के ट्रेलर लांच पर हुई एक ख़ास बातचीत में हुमा ने बताया था कि इस फिल्म में उन्होंने अपनी जान और आत्मा दोनों डाल दी है. फिल्म में हुमा ने एक मुस्लिम लडक़ी आलिया की भूमिका निभाई है जिसे एक हिंदू लड़के से प्यार हो जाता है. हुमा ने बताया कि फिल्म की कहानी विभाजन के बारे में है जिसमें एक प्रेम कहानी को दिखाया गया है. यह कहानी तब की है जब अंतिम वायसराय भारत आए थे. ये फिल्म भारत मेंं इस साल अगस्त में रिलीज होगी. अपने करियर की प्रगति से संतुष्ट नजर आ रही हुमा कुरैशी का कहना है कि फिल्मेकर्स उन्हें एक्ट्रेस समझते हैं जो स्टार होने की स्थिति से ज्यादा बेहतर है. बहरहाल आगामी दिनों में हुमा कुरैशी रजनीकांत और नाना पाटेकर के साथ बहुचर्चित फिल्म ‘काला’ में नजर आएंगी जो वाकई उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

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