जब डॉक्टर्स ने सुनील दत्त को दी नरगिस को मारने की सलाह

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सुनील दत्त और नरगिस की जोड़ी बॉलीवुड में सबसे आदर्श जोड़ी मानी जाती है. सुनील दत्त की जवांमर्दी की कायल रही नरगिस ने एक आदर्श पत्नी की तरह ना केवल सुनील दत्त को संभाला बल्कि उनके परिवार को भी एक मजबूत सहारा दिया।मदर इंडिया की शूटिंग के दौरान नरगिस को मौत के मुंह से खींच लाने वाले सुनील दत्त ने वो दिन भी देखा जब डॉक्टरों ने उन्हें कैंसर की भयंकर पीड़ा से तड़पती नरगिस को मौत  के मुंह में धकेलने की सलाह दे डाली. 

स्ट्रगल के दिनों में सुनील दत्त एक रेडियो आर जे का काम किया करते थे. रेडियो सायक्लोन की तरफ उन्हें नरगिस के इंटरव्यू का काम सौंपा गया था.नरगिस उस समय की बड़ी स्टार मानी जाती थी. पहली बार नरगिस को अपने सामने देख कर सुनील दत्त बुरी तरह नर्वस हो गए और उनसे एक भी  सवाल नहीं पूछ पाए. इस नर्वसनेस के कारण सुनील दत्त की नौकरी जाते-जाते बची थी. 
नरगिस से सुनील दत्त की दूसरी मुलाक़ात विमल रॉय की फिल्म ‘दो बीघा ज़मीन’ के सेट पर हुई.नरगिस वहां विमल रॉय से मिलने आई थी और सुनील दत्त वहां काम की तलाश में पहुंचे थे. सुनील दत्त को देखते ही नरगिस को पिछ्ला वाकया याद आया तो  वो उनकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गई। 

 1957 महबूब खान ने सुनील दत्त को ‘मदर इंडिया’ में नरगिस के बेटे का रोल दिया। शूटिंग के दौरान सुनील दत्त बार-बार नरगिस के सामने नर्वस हो जाते। नरगिस ने इस दौरान उनकी काफी मदद की जिससे वो सहज होकर अपना रोल निभा संकें।नरगिस की इस दरियादिली के कारण सुनील दत्त नरगिस को चाहने लगे. इस चाहत का क्लाइमैक्स तब सामने आया जब इसी फिल्म के दौरान नरगिस आग में घिर गई तो सुनील दत्त ने जान हथेली पर रख कर उन्हें आग से बाहर निकाला। अब मुहब्बत की आग दोनों तरफ बराबर लग चुकी थी। बाद में दोनों ने शादी भी कर ली.

 1980 तक आते-आते  नरगिस की  कैंसर की बीमारी लाइलाज हो चुकी थी. इलाज के दौरान नरगिस कोमा में चली गयी.इलाज के लिए सुनील दत्त उन्हें अमरीका ले गए.कीमियोथेरेपी के कारण नरगिस को भयंकर पीड़ा होती थी जिसे देख डॉक्टर्स भी काफी चिंतित थे. उनकी इस पीड़ा को देखते हुए   डॉक्टरों ने सुनील दत्त को सलाह दी कि वो नरगिस का लाइफ सपोर्ट सिस्टम स्विच ऑफ कर दें ताकि नरगिस को इस पीड़ा से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाए। लेकिन सुनील दत्त ने इससे साफ़ इंकार कर दिया. सुनील दत्त नरगिस से बेहद प्यार करते थे और उनके साथ एक-एक क्षण को जीना चाहते थे. इसे सुनील दत्त की मुहब्बत का नतीजा कहें या डॉक्टरों की मेहनत नरगिस कुछ दिनों बाद कोमा से बाहर आ गयी और उनकी हालत में तेजी से सुधार भी होने लगा। लेकिन उनका कोमा से बाहर आना एक चमत्कार ही था। नरगिस ज्यादा दिनों तक जीवित ना रह सकी और 3 मई 1981 को उनकी मृत्यु हो गयी.

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