जब Govinda को पीटने वाले Dharmendra,Mithun Chkraborty के सामने गिड़गिड़ाने लगे

0
154

अपनी ख़ास सीरिज ‘एक स्टार दो स्टोरी यानि 2 in i में हम आज बात करते हैं बॉलीवुड के हीमैन धर्मेन्द्र की .धर्मेन्द्र से जुडी दो कहानियों में हम आपको बताएंगे की आखिर धर्मेन्द्र ने क्यों की थी अभिनेता गोविंदा की पिटाई और ये भी जानेंगे की गोविंदा को पीटने वाले धर्मेन्द्र आखिर मिथुन के सामने क्यों गिडगिडाने लगे. तो आइये पहले बात धर्मेन्द्र द्वारा गोविंदा की पिटाई की .

बात तब की है जब बतौर निर्माता हेमा मालिनी महेश भट्ट के निर्देशन में फिल्म ‘आवारगी’ का निर्माण कर रही थी. हेमा ने इस फिल्म में अनिल कपूर के साथ गोविंदा को कास्ट किया था . गोविंदा अनिल कपूर को अपना राइवल मानते थे और उनके साथ काम करने को राजी नहीं थे .लेकिन मामला हेमा मालिनी का था इसलिए वो सीधे ना भी नहीं कहना चाहते थे. इसलिए उन्होंने इस फिल्म को काफी दिनों तक लटकाए रखा. गोविंदा के इस रवैये के कारण फिल्म लगातार लेट होती जा रही थी जिसके कारण हेमा मालिनी को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था.जब गोविंदा के इस रवैये की खबर धर्मेन्द्र तक पहुँची तो उन्होंने गोविंदा को सफाई देने के लिए अपने घर बुलाया .गोविंदा एक दिन धर्मेन्द्र के घर पहुंचे और उन्होंने धर्मेन्द्र के सामने डेट्स ना होने का बहाना बनाना शुरू कर दिया जिसे सुनते ही धर्मेन्द्र ने अपना आपा खोते हुए एक जोरदार थप्पड़ गोविंदा को रसीद कर दिया .धर्मेन्द्र के इस थप्पड़ से अवाक गोविंदा से कुछ कहते नहीं बना और वो वहीं बैठ गए .मौके की नजाकत को समझते हुए हेमा मालिनी बीच में आ गई और दोनों को शांत करवाया .आखिरकार गोविंदा इस फिल्म में काम करने को राजी हो गए .महेश भट्ट के निर्देशन में बनी ये फिल्म 1990 की हिट फिल्म साबित हुई. अपने पूरे करियर में महेश भट्ट और गोविंदा की ये पहली और आख़िरी फिल्म थी.

अभिनेता धर्मेन्द्र अपने दोनों बेटे सनी और बॉबी के फ़िल्मी करियर को लेकर शुरुआत से ही काफी फिक्रमंद रहे हैं.खासकर सनी के करियर को आगे बढाने के लिए धर्मेन्द्र ने बॉलीवुड में प्रचलित सभी तिकड़मों का सहारा लिया आज बात फिल्म घायल की .घायल सनी देओल के करियर की एक माइलस्टोन फिल्म थी. इस फिल्म ने सनी के करियर को एक नया मोड़ दिया .लेकिन ये फिल्म सनी को दिलवाने के लिए धर्मेन्द्र को मिथुन के सामने हाथ जोड़ने पड़ गए .आइये जानते हैं क्यों ..

1987-1988 के बीच सनी देओल की सात फ़िल्में एक के बाद एक फ्लॉप साबित हुई .लगातार फ्लॉप फिल्मों के कारण सनी के करियर पर ख़तरा मंडरा रहा था. जाहिर है इससे धर्मेन्द्र काफी परेशान थे. इसी बीच उन्हें पता चला की राज कुमार संतोषी के पास एक अच्छी स्क्रिप्ट है .धर्मेन्द्र ने जब वो स्क्रिप्ट देखी तो उन्हें काफी पसंद आई .उन्होंने राज कुमार संतोषी से कहा की वो इस फिल्म की स्क्रिप्ट को अपने बैनर के लिए खरीदना चाहते हैं. लेकिन संतोषी इस स्क्रिप्ट पर फिल्म बनाने के लिए पहले ही मिथुन चक्रवर्ती को साइन कर चुके थे. इसलिए उन्होंने धर्मेन्द्र के सामने हाथ जोड़ लिए .उन्होंने धर्मेन्द्र से कहा की अगर वो मिथुन को मना लें तो उन्हें सनी के साथ फिल्म बनाने में कोई ऐतराज़ नहीं है .बात बेटे के करियर की थी .इसलिए धर्मेन्द्र ने वो किया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. धर्मेन्द्र एक दिन मिथुन से मिलने उनके घर जा पहुंचे .मिथुन को जब धर्मेन्द्र के आने का मकसद पता चला तो वो हैरान रह गए .धर्मेन्द्र जैसी बड़ी शख्सियत उनसे इस फिल्म को सनी के लिए छोड़ने की मिन्नतें कर रहा था .भला मिथुन धर्मेन्द्र को मना कैसे कर सकते थे.वैसे भी मिथुन उन दिनों करीब २० फिल्मों में काम कर रहे थे. धर्मेन्द्र का लिहाज कर उन्होंने इस पर अपनी सहमती दे दी और इस तरह घायल सनी देओल की झोली में आ गिरी .घायल जबरदस्त हिट रही और इस फिल्म ने सनी के करियर को नया जीवन दे दिया .इसी साल राजीव राय की फिल्म ‘त्रिदेव’ भी हिट रही और इस तरह सनी की डगमगाती नैया फिर से चल पडी .

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here