Dharmendra (Part-6) : जानिए ! राजेंद्र कुमार ने क्यों खाई धर्मेंद्र के साथ कभी काम ना करने की कसम

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1964 में निर्माता जे ओम प्रकाश, मोहन कुमार के निर्देशन में फिल्म ‘आई मिलन की बेला’ का निर्माण कर रहे थे. इस फिल्म के लीड रोल में राजेंद्र कुमार और सायरा बानो थे. फिल्म में सेकेंड लीड के लिए एक ऐसे हीरो की जरुरत थी, जो विलेन होने के साथ-साथ मासूम भी लगे. चूंकि रोल निगेटिव था, इसलिए कोई बड़ा हीरो इसमें काम करने के लिए तैयार नहीं था. बड़ी मुश्किल से राजेंद्र कुमार ने धर्मेंद्र को इस फिल्म में काम करने के लिए मना लिया. लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद जो कुछ हुआ उसके बाद राजेंद्र कुमार ने फिर कभी धर्मेंद्र के साथ काम ना करने की कसम ही खा ली.

राजेंद्र कुमार सीनियर अभिनेता थे और सफल भी. इसलिए जब उन्होंने धर्मेंद्र से इस प्रोजेक्ट को स्वीकार करने की गुजारिश की तो वो मना नहीं कर पाए. फिल्म में धर्मेंद्र विलेन बने थे और राजेंद्र कुमार और सायरा बानो रोमांटिक लीड में थे. फिल्म रिलीज हुई और जबरदस्त हिट रही, लेकिन इसका सारा क्रेडिट धर्मेंद्र को मिला. निगेटिव रोल में भी उनकी फीमेल फैन फोलोइंग ने उन्हें पसंद किया और कामयाबी का सेहरा धर्मेंद्र के सर पर सजा.

जाहिर है इससे राजेंद्र कुमार जलभुन गए. उन्हें ये गंवारा नहीं था कि धर्मेंद्र जैसा जूनियर अभिनेता फिल्म की कामयाबी का सारा क्रेडिट ले जाए. लेकिन अब राजेंद्र कुमार कर ही क्या सकते थे. इस फिल्म के बाद राजेंद्र कुमार ने धर्मेंद्र के साथ ऑफर की गई कई फ़िल्में ठुकरा दी. यहां तक कि जब उनके जीजा ओपी रल्हन ने उन्हें धर्मेंद्र के साथ फिल्म ‘फूल और पत्थर’ में काम करने को कहा तो उन्होंने साफ़ इंकार कर दिया. वैसे ये धर्मेंद्र के लिए भी अच्छा ही रहा क्योंकि ये फिल्म धर्मेंद्र के करियर में मील का पत्थर साबित हुई.

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