बॉलीवुड की पिच पर बोल्ड होते रहे हैं क्रिकेटर्स

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सचिन-अ बिलियन ड्रीम्स’ के जरिए भारतीय क्रिकेट के बाहुबली यानि सचिन तेंदुलकर ने भी रुपहले परदे पर नजर. वैसे ये पहला मौक़ा नहीं था. उनसे पहले संदीप पाटिल, सैयद किरमानी ,सुनील गावस्कर ,विनोद कांबली और अजय जडेजा जैसे खिलाड़ी भी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं. बहरहाल क्रिकेट से मिली अपार लोकप्रियता को जब इन खिलाड़ियों ने बॉलीवुड की पिच पर भुनाना चाहा पहली ही बॉल में बोल्ड हो गए. आइए डालते हैं नज़र उन खिलाड़ियों पर जिन्होंने क्रिकेट के ग्राउंड पर तो खूब चौके-छक्के मारे लेकिन बॉलीवुड की पिच पर पहली ही बॉल में बोल्ड गए.

सुनील गावस्कर

सुनील गावस्कर पहले ऐसे भारतीय क्रिकेटर थे जिन्होंने अपने खेल करियर के दौरान ही फिल्मों का रुख कर लिया. 1980 में आई मराठी फिल्म ‘सावली प्रेमाची’ उनकी पहली फिल्म थी. इसके बाद गावस्कर 1988 में बनी फिल्म ‘मालामाल’ में नसीरुद्दीन शाह के साथ नजर आए. लेकिन ये दोनों ही फ़िल्में फ्लॉप साबित हुए. एक्टिंग में भले ही गावस्कर का बल्ला चल नहीं पाया लेकिन उनका गया गाना मराठी गाना ‘या दुनिया मध्ये’ खूब लोकप्रिय हुआ. लेकिन सुनील गावस्कर ने फिल्मों में समय गंवाने से बेहतर कमेंन्टेटर का माइक थामना ही बेहतर समझा.

संदीप पाटिल

क्रिकेट के मैदान पर और मैदान के बाहर बेहद सफल खिलाड़ी रहे संदीप पाटिल ने 1985 में ‘कभी अजनबी थे’ में चर्चित अभिनेत्री पूनम ढिल्लो के ऑपोजिट काम किया. पाटिल के अलावा इस फिल्म में विकेटकीपर-बल्‍लेबाज सैयद किरमानी और कैरेबियाई क्रिकेटर क्लाइव लॉयड भी थे. लेकिन पाटिल की जबरदस्त लोकप्रियता बावजूद वो बॉलीवुड के लिए अजनबी ही साबित हुए।पहली असफलता के बाद उन्होंने फिर कभी बॉलीवुड का रुख नहीं किया.

कपिल देव

80 के दशक में जब कपिल देव अपनी बॉल के साथ ग्राउंड पर उतरते थे इंडिया की साँसे थम जाती थी. कपिल पाजी ने बतौर भारतीय कप्तान देश को पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड का चैम्पियन बनाया. लेकिन कपिल पा जी ने जब ‘इकबाल’ स्टम्प,और मुझसे शादी करोगी के जरिए बॉलीवुड का रुख किया तो मजाक का पात्र बन गए. सोहेल खान की ‘आर्यन’ कपिल देव के लिए खुद भी बुरा अनुभव साबित हुई.

अजय जडेजा

अजय जडेजा 2003 में सनी देओल और सुनील शेट्टी की मुख्य भूमिका में आई फिल्म ‘खेल’ में पर्दे पर दिखे. इसके 5 साल बाद वह फिल्म ‘पल पल दिल के साथ’ में भी जडेजा दिखे. अभिषेक कपूर की फिल्म ‘काई पो चे’ में भी वह रुपहले पर्दे पर नजर आए हालांकि उन्होंने इसमें क्रिकेट कमेंट्रेटर की ही भूमिका निभाई थी. अपनी जबरदस्त लोकप्रियता के बावजूद जडेजा क्रिकेट की तरह पर्दे पर कामयाब नहीं हो सके. जडेजा की पर्सनलिटी आकर्षक थी और वो लोकप्रिय भी लेकिन ‘खेल’ में एक्टिंग करते हुए जडेजा ने समझ लिया होगा कि ये कोई खेल नहीं है.

विनोद कांबली

टीम इंडिया के पूर्व मध्य क्रम के बल्‍लेबाज रहे विनोद कांबली ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में की थी, लेकिन कुछ ही सालों में उनके करियर का ग्राफ तेजी से गिरता गया. क्रिकेट के बाद उन्होंने फिल्मों में हाथ आजमाने की कोशिश की और 2002 में वह संजय दत्त और सुनील शेट्टी स्टारर फिल्म ‘अनर्थ’ से फिल्मी करियर शुरू की.

इस फिल्म में वह सुनील शेट्टी के मित्र बंड्या के किरदार में दिखाई दिए. हालांकि उन्हें दूसरी फिल्म के लिए 7 साल का इंतजार करना पड़ा. 2009 में आई ‌फिल्म ‘पल पल दिल के साथ’ में विनोद कांबली के नाम से पर्दे पर आए. एक मलयालम फिल्म की रिमेक इस फिल्म के नायक की भूमिका टीम इंडिया में उनके साथी रहे अजय जडेजा ने निभाई थी, जबकि नायिका माही गिल थी. कांबली के लिए इन फिल्मों का अनुभव ऐसा रहा कि उन्होंने तौबा ही कर ली.

हरभजन सिंह

टर्बनेटर’ के नाम से मशहूर हरभजन सिंह नाचने-गाने के बेहद शौकीन हैं और वह भी फिल्मी पर्दे पर अपने लटके-झटके दिखाने का मन रोक नहीं पाए. पहली बार हरभजन 2004 में आई फिल्म ‘मुझसे शादी करोगी’ में दिखे. अपने बॉलीवुड प्रेम के कारण ही भज्जी अभिनेत्री गीता बसरा के हाथों कैच हो गए. वो हरमन बवेजा की फिल्म ‘विक्ट्री’ में भी दिखे. हरभजन के अलावा इस फिल्म में सुरेश रैना, रोहित शर्मा, ब्रेट ली, प्रवीण कुमार और शोएब मलिक समेत दुनियाभर के ढेरों क्रिकेटर पर्दे पर मैच खेलते दिखाई दिए.

सलिल अंकोला

पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रह चुके सलिल अंकोला ने अपने क्रिकेट करियर के बीच में ही सिनेमाई पर्दे का रुख कर लिया. 2000 में संजय दत्त की फिल्म ‘कुरुक्षेत्र’ में उन्होंने पुलिस अफसर का रोल निभाया. उनकी पहली फिल्म जरूर हिट रही लेकिन उसका फायदा उठाने में अंकोला नाकामयाब रहे. इसके बाद वह ‘पिता’ ‘चुरा लिया है तुमने’ और ‘साइलेंस प्लीज’ जैसी फिल्मों में भी नजर आये. बड़े पर्दे पर जादू ना चलते देख अंकोला ने छोटे पर्दे का रुख किया. सीआईडी और बिग बॉस-1 आदि में काम भी मिला, लेकिन वो कुछ ख़ास नहीं कर पाए और आजकल गुमनामी में जी रहे हैं.

वेंकटेश प्रसाद

पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद का अंतरराष्ट्रीय करियर बहुत ज्यादा नहीं चला, लेकिन वह पा‌किस्तान के खिलाफ भारत के लिए काफी लकी गेंदबाज माने जाते थे. उन्होंने एक कन्‍नड फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की. ‘सचिन तेंदुलकर आला’ नाम की इस फिल्म में वह एक क्रिकेट कोच की भूमिका में दिखे. लेकिन ये उनका पहला और आख़िरी मौक़ा साबित हुआ.

पूरी दुनिया में क्रिकेटर्स फिल्म स्टार्स की तुलना में ज्यादा पॉपुलर हैं और उनकी फैन फॉलोइंग भी स्टार्स के मुकाबले ज्यादा होती है. यही वजह है कि फिल्ममेकर्स इन क्रिकेटर्स के स्टेटस को कैश करने के लिए उन्हें अपनी फिल्म में लेते हैं. लेकिन क्रिकेट की पिच फ़िल्मी पिच से बिलकुल अलहदा होती है. यहां बल्ले से ज्यादा आँखों से बोलना होता है और इस कला में अब तक तो सारे खिलाड़ी फिसड्डी ही साबित होते रहे हैं. ‘सचिन अ बिलियन ड्रीम्स’ की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट इस परम्परा की किस्मत तय कर सकती है.,

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