दिल जवां हो तो बुढ़ापा नहीं आता-अनिल कपूर

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अस्सी दशक की शुरुआत में जब नए सितारों वाली एक फिल्म ‘वो सात दिन’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े तो सबको हैरत हुई थी। इस फिल्म में संघर्षरत संगीतकार प्रेमप्रताप पटियालावाले की भूमिका निभाकर चर्चा में आए अभिनेता अनिल कपूर ने इन बीस-पच्चीस सालों में कामयाबी का जो लंबा सफर तय किया वह सिर्फ उनके बूते की बात थी। सुभाष घई/ यश चोपड़ा जैसे शीर्ष फिल्मकारों से लेकर जनता-जर्नादन तक अनिल कपूर ने पसंदीदा कलाकार की हैसियत अर्जित की। ‘रामलखन’, ‘कर्मा,’, ‘बेटा’, ‘तेजाब’, ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों के जरिए अनिल ने एक समर्थ एवं प्रतिभावान अभिनेता की छवि बनाई। करियर के ताजा दौर में भी ‘विरासत’, ‘नायक’, ‘माय वाइव्स मर्डर’, ‘नो एंट्री’ जैसी फिल्मों के जरिए अनिल अपनी बहुआयामी कलाकार की पहचान को मजबूत करते नजर आए।

गुजरे जमाने के मशहूर निर्माता सुरेन्द्र कपूर के मँझले पुत्र अनिल कपूर उम्र के उस दौर में हैं जहां उम्र रिटायर्मेंट की हो जाती है लेकिन उनका रूतबा आज भी बरकरार है .उनके मुताबिक़ ‘उन्हें नई पीढ़ी के सितारों से कोई खतरा महसूस नहीं होता। अनिल के शब्दों में ‘यह कहना गलत होगा कि नए कलाकार मुझसे भयभीत रहते हैं, बल्कि मुझे उनके आगे काम करते वक्त सकुचाहट होती है कि कहीं वे मुझसे बेहतर न साबित हों। अभिनय को लेकर मैंने हमेशा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में विश्वास किया है। यहाँ तक कि मेरी फ्लॉप फिल्में भी एक्टिंग के लिए सराही गईं। मुझे समीक्षकों और दर्शकों से यह टिप्पणी सुनकर रोमांच का अनुभव होता था कि ‘फिल्म भले पिट गई पर अनिल का काम शानदार था।’

अनिल कपूर इन दिनों दो फिल्मों में विलेन का किरदार निभा रहे हैं. क्या इससे उनकी इमेज पर असर पड़ सकता है ? उनका कहना है- ‘शाहरुख पहले अभिनेता थे जिन्होंने ‘डर’ जैसी फिल्म में सन्नी देओल के हाथ इस कदर मार खाई। इसके पहले किसी नायक की परदे पर पिटाई होते देख दर्शकों ने इस तरह सीटियाँ नहीं बजाई थीं। अब मुझे भी विलेन के हाथ मार खाना बुरा नहीं लगता। बल्कि मैं कहता हूँ-‘और मार ले भाई, दर्शक मुझ पर जरूर रहम खाएगा?’ यदि जनता की तालियाँ मिलें तो पिटने में कोई बुराई नहीं है।

अनिल कपूर और माधुरी की जोड़ी हिन्दी सिनेमा की सर्वाधिक कामयाब सितारा जोड़ियों में शुमार की जाती रही है। ‘तेजाब’, ‘हिफाजत’, ‘बेटा’, ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों में अनिल और माधुरी का तालमेल हर वर्ग के दर्शक ने सराहा था। यह अनिल के व्यक्तित्व का जिंदादिल तौर-तरीका ही था कि वे माधुरी के अलावा जूही चावला, रानी मुखर्जी, श्रीदेवी जैसी तारिकाओं के साथ भी भरपूर सराहे गए।जल्द ही अनिल कपूर और माधुरी की हिट जोड़ी फिल्म ‘टोटल धमाल’ में नजर आएंगी. 

महिलाओं के पसंदीदा सितारे अनिल की फिल्मों ‘जुदाई’ और ‘हम आपके दिल में रहते हैं’ ने पारिवारिक फिल्मों की सफलता का नया इतिहास रचा था। ‘अंदाज’, ‘मुसाफिर’ जैसी फिल्मों में ग्लैमरस भूमिकाएँ निभाने के बावजूद अनिल की वह पारिवारिक छवि उनसे दूर नहीं हुई है जो उन्हें ‘मि. इंडिया’, ‘रखवाला’, ‘जुदाई’ जैसी फिल्मों के जरिए हासिल हुई थी। जिंदगी की जीत में यकीन करने वाले अनिल का विश्वास उन्हें इंडस्ट्री में इस मुकाम तक लाया है।उम्र के इस पड़ाव पर भी अनिल कपूर काफी फिट और जवान नज़र आते हैं. बकौल अनिल कपूर ‘दिल जवान होना चाहिए आदमी कभी बूढा नहीं होता .

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