Amitabh-feroz Khan Fight:6 महीने इंतज़ार करवाने के बाद फिल्म करने से किया इंकार,भड़क उठे फ़िरोज़ खान

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1978 की एक शाम जब अमिताभ बच्चन अपने घर पर आराम फरमा रहे थे तभी उनके घर फोन की घंटी घनघना उठी .ये कॉल फिरोज खान का था .फिरोज ने उनसे कहा कि वो उनसे मिलना चाहते हैं .अगर उन्हें वक़्त हो तो वो  उनसे मिलने आ जाएं .अमिताभ बच्चन फिरोज से मिलने उनके ऑफिस पहुंचे तो फिरोज खान ने उनसे कहा कि वो काफी दिनों से उनके साथ एक फिल्म बनाने की प्लानिंग कर रहे हैं. अगर उन्हें कहानी पसंद हो तो आगे की बात की जाए. अमिताभ ने कहानी सुनी तो उन्हें वाकई काफी पसंद आई .अमिताभ ने इस फिल्म में काम करने की हामी भर दी और छह महीने बाद की एकमुश्त डेट्स भी दे दी .ये फिल्म थी कुर्बानी .तो फिल्म साइन करने के बाद भी अमिताभ ने इस फिल्म में काम क्यों नहीं किया .आइये जानते हैं..

 

अमिताभ बच्चन की सहमती मिलने के बाद फिरोज खान ने फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर काम शुरू कर दिया .उन्होंने फिल्म के सारे गाने लन्दन जाकर रिकॉर्ड करवा लिए और अमिताभ की डेट्स का इंतज़ार करने लगे .लेकिन जब अमिताभ की मोहलत ख़त्म हुई तो उन्होंने फिरोज खान के सामने एक नई शर्त रख दी. दरअसल अमिताभ चाहते थे कि इस फिल्म की मुंबई टेरिटरी मेहनताने के रूप में उन्हें दिए जाएं और साथ ही 8 लाख का भुगतान अलग से किया जाए. जाहिर है अमिताभ की ये शर्त सुन  फिरोज खान भड़क उठे .उनका कहना था कि अगर इतने पैसे अमिताभ को ही दे दिए जाएं तो फिल्म बनेगी कैसे ? इससे भी ज्यादा गुस्सा उन्हें इस बात पर आया कि छह महीने इंतज़ार करवाने के बाद अमिताभ नई शर्तें क्यों थोप रहे हैं. उन्होंने खुले रूप से अमिताभ को चुनौती देते हुए कहा -ये फिल्म उनके बगैर भी बनेगी और हिट भी होगी .खान ने इसके बाद फिल्म के लिए विनोद खन्ना को मुंहमांगी कीमत पर फिल्म का हिस्सा बनाया .

कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन को दी गई चुनौती पर खरा उतरने के लिए फिरोज खान ने इस फिल्म पर पानी की तरह पैसा बहाया.  फिल्म कुर्बानी के लिए जो कुछ उन्होंने किया वह उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में पागलपन समझा जाता था। फिल्म में उन्होंने एक असली मर्सिडीज कार तहस नहस कर दी थी, ये वो समय था जब हिंदुस्तान में महंगी से महंगी गाड़ियां रखने वालों ने भी भारत की सड़कों पर मर्सिडीज नहीं देखी थी।

 1980 में रिलीज हुई कुर्बानी ने उस साल सबसे ज्यादा कमाई का रिकॉर्ड बनाया था. जबकि इस साल अमिताभ की तीन फ़िल्में रिलीज हुई और तीनों औसत रही. 

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