प्रिया राजवंश : गिफ्ट में मिले बंगले में ही खुद गई कब्र

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साल 1937 में शिमला में जन्मीं प्रिया अपने जमाने की खूबसूरत एक्ट्रेसेस में गिनी जाती थीं, लेकिन उनकी कहानी बहुत दर्द भरी है. प्रिया राजवंश को फिल्मों में लाने का श्रेय चेतन आनंद को जाता है. जब प्रिया नाटकों में काम करती थीं, तभी एक फोटोग्राफर ने उनकी फोटोज खींची. इन्हीं फोटोज को एक दोस्त के घर पर चेतन आनंद ने देख लिया और उन्हें प्रिया भा गईं. दरअसल, चेतन उस समय अपनी नई फिल्म ‘हकीकत’ के लिए एक नए चेहरे की तलाश में थे. जब उन्होंने प्रिया की फोटोज देखी तो उन्हें वे फिल्म के लिए बिल्कुल परफेक्ट लगीं. चेतन ने तुरंत प्रिया से कॉन्टैक्ट किया और उन्हें फिल्म में साइन कर लिया. हकीकत’ के बाद प्रिया को दूसरे डायरेक्टर्स ने कई फिल्में ऑफर की, लेकिन उन्होंने सिर्फ चेतन की फिल्मों में काम करना ही मुनासिब समझा. इसी वजह से प्रिया के नाम बहुत कम फिल्में रहीं. ‘हकीकत’ के बाद 1970 में ‘हीर रांझा’, 1973 में ‘हिंदुस्तान की कसम’ और ‘हंसते ज़ख्म’, 1977 में ‘साहेब बहादुर’, 1981 में ‘क़ुदरत’ और 1985 में ‘हाथों की लकीरें’ में ही उन्होंने काम किया.

चेतन आनंद अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत परेशान चल रहे थे. ऐसे में शूटिंग के दौरान प्रिया से उनकी नजदीकियां बढ़ने लगीं. हालांकि, चेतन और प्रिया की उम्र में करीब 16 साल का अंतर था, लेकिन यह फासला उन्हें करीब आने से नहीं रोक पाया. प्रिया सिर्फ चेतन की होकर ही रह गईं. प्रिया ने चेतन आनंद से शादी नहीं की थी, लेकिन उन्हें उनकी पत्नी के रूप में ही जाना जाता था. चेतन आनंद ने अपनी पहली शादी नहीं तोड़ी, लेकिन प्रिया के लिए एक अलग बंगला बनवाया और कई सालों तक साथ रहे. चेतन के साथ प्रिया अपनी जिंदगी खुशहाल तरीके से जी रही थीं, लेकिन मुश्किलें तब खड़ी हुईं, जब चेतन का निधन हो गया. साल 1997 में जब चेतन की डेथ हुई तो प्रिया एकदम अकेली पड़ गईं. उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी का कारण वह बंगला था, जो चेतन ने उनके लिए बनवाया था. इस बंगले की कीमत लगातार बढ़ती जा रही थी. चेतन के बेटे केतन आनंद और विवेक आनंद प्रिया को इस बंगले से निकाल देना चाहते थे, ताकि इसे हथिया सकें. लेकिन उनकी हर कोशिश नाकाम रही.

चेतन के बेटों पर लालच का भूत इस कदर सवार था कि उन्होंने इसके लिए सारी हदें पार कर दीं. उन्होंने बंगले में काम करने वाली नौकरानी और कर्मचारी को अपने साथ मिलाकर प्रिया के मर्डर का षडयंत्र रचा. 27 मार्च, 2000 को प्रिया अपने बंगले में रहस्यमयी तरीके से मृत मिलीं. इस खबर के सामने आते ही हड़कंप मच गया. पहले तो यह कहा गया कि चेतन की मौत से दुखी प्रिया ने आत्महत्या कर ली, लेकिन जब पड़ताल हुई तो सच सामने आया. मुंबई की एक अदालत ने 31 जुलाई, 2002 को केतन आनंद और विवेक आनंद सहित उनके सहयोगियों उम्रकैद की सज़ा सुनाई.

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