जब हॉलीवुड ने निम्मी को कहा ‘UNKISSED GIRL OF INDIA’

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साल 1951 में बनी महबूब खान की फिल्म ‘आन’ ओवरसीज मार्केट में काफी चर्चित हुई. ब्रिटेन की महारानी ने लंदन में जब इस फिल्म का एक विशेष प्रीमियर आयोजित किया तो फिल्म के कलाकारों को भी वहां आमंत्रित किया. कई ब्रिटिश कलाकार इस फिल्म के कलाकारों के सम्मान में आयोजित पार्टी में मौजूद थे. ब्रिटिश रिवाज के अनुसार इन कलाकारों का हाथ चूम-चूमकर उनका स्वागत कर रहे थे. जैसे ही एक ब्रिटिश कलाकार ने चूमने के लिए निम्मी का हाथ पकड़ा वो झटके से पीछे हट गईऔर नाराज़ होते हुए बोली – ‘मैं एक भारतीय लडकी हूं और ऐसे रिवाजों में विश्वास नहीं रखती.’ इस घटना ने निम्मी को ब्रिटिश अखबार की सुर्ख़ियों में ला दिया. अख़बारों में ‘द अनकिस्ड गर्ल ऑफ़ इंडियन सिनेमा’ नाम से निम्मी पर एक विशेष आलेख प्रकाशित किया गया और ‘आग’, ‘बरसात’ और ‘अंदाज’ में अब तक छोटी-छोटी भूमिकाएं निभानेवाली निम्मी का कद अचानक काफी बड़ा हो गया. इस घटना के बाद वो हॉलीवुड के निर्देशकों की नजर में आ गई और उन्हें 5 फिल्मों के ऑफर मिले, लेकिन निम्मी ने ये कहकर इन सभी प्रस्तावों को ठुकरा दिया कि ‘वो केवल भारतीय फिल्मों में ही काम करना चाहती हैं.’

उन दिनों महबूब खान दिलीप कुमार और राजकपूर के साथ फिल्म ‘अंदाज’ का निर्माण कर रहे थे. निम्मी अक्सर महबूब खान की पत्नी सरदार अख्तर के साथ सेन्ट्रल इंडिया स्थित फिल्म के सेट पर आया करती थी. महबूब खान की नजर जब उनपर पड़ी तो उन्होंने निम्मी को फिल्म ‘अंदाज़’ में एक छोटी सी भूमिका ऑफर की. खान की इस फिल्म में एक ऐसी लड़की की ज़रूरत थी जो अच्छी उर्दू बोल सके और निम्मी काफी अच्छी उर्दू बोलती थी. जब पहले दिन उन्हें ऑडिशन के लिए बुलाया गया तो वो बुरी तरह नर्वस हो गई. दिलीप कुमार, राजकपूर और महबूब खान जैसी शख्सियत को सामने देखकर निम्मी इतनी हडबडा गई कि अपना डायलोग ही भूल गई और इस खीज के कारण उन्हें रोना आ गया. महबूब खान ने सोचा कि अपनी भूमिका को वास्तविक बनाने के लिए उसकी आंखों में स्वतः आंसू आ गए हैं. गलतफहमी में ही सही निम्मी इस इम्तिहान में पास हो गई और ‘अंदाज’ का हिस्सा बन गई.

निम्मी जब अपने करियर के शीर्ष पर थी तभी अचानक उन्होंने 17 अप्रैल, 1966 को महबूब खान के पसंदीदा लेखक एस.अली रजा से शादी करने का फैसला कर सबको चौका दिया. आखिरी बार निम्मी साल 1986 में के.आसिफ की फिल्म ‘लव एंड गॉड’ में नजर आई. निम्मी के चहरे की सादगी और भोलापन हमेशा उनके किरदार पर भी हावी रहा. निम्मी के व्यक्तित्व की कुछ सीमाओं के कारण उनकी भूमिकाओं में भी विविधता की कमी रही. मगर अपने सिमित दायरे में भी निम्मी कई फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ने में सफल रही.

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