Raaj Kumar:अक्खड़ मिजाजी और अकड़पन ने ही बनाया स्टार

0
96

dialogue डिलीवरी के बादशाह माने जाने वाले राज कुमार एक अनोखी शख्सियत थे. उन्होंने हिन्दी सिनेमा को संवाद अदायगी का एक नया अंदाज बख्शा .केवल अपनी अकड़ और आवाज के बूते इंडस्ट्री में इतना बड़ा मुकाम हासिल कर लेना कोई मामूली बात नहीं  है .आज ‘ऐसे बने स्टार’ सीरिज की इस कड़ी में डालते हैं नजर राज कुमार संघर्ष यात्रा पर .

.फिल्मों में आने से पहले राज कुमार उर्फ़ कुलभूषण पंडित मुंबई के माहिम पुलिस स्टेशन में  सब इन्स्पेक्टर हुआ करते थे. . राज कुमार स्वभाव से ही काफी अकडू और दबंग थे .मुजरिमों के साथ उनका रवैया इतना सख्त था की कई बार सस्पेंड होते-होते बचे .राज कुमार कभी अपने सीनियर ऑफिसर्स को सैल्यूट नहीं करते थे .बॉलीवुड के मशहूर  निर्माता-निर्देशक सोहराब मोदी एक दिन किसी काम से माहिम पुलिस स्टेशन पहुंचे.वहां राज कुमार ने मोदी से काफी अकड़  के साथ बात की. हालाँकि मोदी को राज कुमार का ये रवैया काफी बुरा लगा लेकिन मोदी एक जहीन फिल्ममेकर थे. उन्हें राज कुमार में एक भावी स्टार नज़र आया.   उन्होंने वहीं राज कुमार को फिल्मों में काम करने का ऑफर दे दिया लेकिन राज कुमार ने इस ऑफर को सोचेंगे कह कर टाल  दिया. 

  राजकुमार मुंबई के जिस थाने मे कार्यरत थे वहाँ एक बार  फ़िल्म निर्माता बलदेव दुबे कुछ जरूरी काम के लिये आये हुए थे। वह राजकुमार के बातचीत करने के अंदाज से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने राजकुमार से अपनी फ़िल्म ‘शाही बाजार’ में अभिनेता के रूप में काम करने की पेशकश की और बदले में मोटी रकम ऑफर की .इस बार राज कुमार टाल  नहीं पाए .  उन्होंने तुरंत ही अपनी सब इंस्पेक्टर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और निर्माता की पेशकश स्वीकार कर ली।
शाही बाजार  बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी।वर्ष 1952 से 1957 तक राजकुमार फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहे।  इस बीच उन्होंने  कई फ़िल्मों में अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई।राजकुमार के तमाम रिश्तेदार यह कहने लगे कि तुम्हारा चेहरा फ़िल्म के लिये उपयुक्त नहीं है। और कुछ लोग कहने लगे कि तुम खलनायक बन सकते हो।इन तानों और  असफलता से राज कुमार काफी हताश हो चुके थे. एक दिन मुंबई के मेट्रो सिनेमा में उनकी मुलाक़ात महबूब खान से हुई .महबूब राज कुमार के बात करने के अंदाज़ से काफी प्रभावित हुए .उन्होंने वहीं अपनी फिल्म मदर इंडिया में काम करने का ऑफर राज कुमार को दे डाला .               

वर्ष 1957 में प्रदर्शित  मदर इंडिया  हालांकि पूरी तरह अभिनेत्री नरगिस पर केन्द्रित थी फिर भी राज कुमार अपनी छोटी सी भूमिका में अपने अभिनय की छाप छोड़ने में कामयाब रहे। इस फ़िल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति भी मिली और फ़िल्म की सफलता के बाद राज कुमार बतौर अभिनेता फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गए। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here