विरासत का भार ढ़ोते अभिषेक बच्चन

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समृद्ध विरासत हमेशा उपहार साबित होती है लेकिन अभिनेता अभिषेक बच्चन के लिए ये एक भार ही साबित होता रहा है. कम से कम अब तक के उनके फ़िल्मी करियर को देखते हुए तो यही लगता है कि पिता अमिताभ बच्चन की शोहरत के साये में अभिषेक का कोई नया व्यक्तित्व ही नहीं उभर पाया. महानायक के बेटे होने के नाते उन्हें एक नहीं कई मौके मिले. बार -बार मिले लेकिन हर मौके पर वो सीनियर बच्चन की शोहरत की अक्स से लड़ते ही नज़र आये. फ़िल्मी दर्शक उनमे महानायक पिता की छवि ढूंढते हैं. लेकिन अभिषेक इस छवि से अलग अपनी पहचान की तलाश में रहते हैं. जाहिर है अभिषेक कहीं न कहीं दर्शकों की उम्मीद पर पूरी तरह खरे नहीं उत्तर पाये. बावजूद इसके उनकी गिनती बॉलीवुड के कामयाब अभिनेताओं होती है भले ही ये कामयाबी पिता के मुकाबले छोटी हो.

5 फरवरी 1976 को अमिताभ बच्चन और जाया बच्चन की पहली संतान के रूप में जन्मे अभिषेक बच्चन परवरिश फ़िल्मी से ज्यादा साहित्यिक माहौल में हुई. दादा हरिवंश राय बच्चन की साहित्यिक विरासत पापा अमिताभ बच्चन की फ़िल्मी विरासत पर हावी थी. बचपन से ही उन्होने इन दोनों विरासत के बीच तालमेल बिठाना सीख लिया. भले ही दादा का स्टारडम पिता के स्टारडम से बड़ा था लेकिन अभिषेक ने पिता के पदचिन्हों का ही अनुसरण करना बेहतर समझा और साल 2000 में जे पी दत्ता की फिल्म “रिफ्यूजी” से बॉलीवुड में दाखिल हो गए. उनके आगमन का शोर तो खूब हुआ लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर टांय -टांय फिस्स हो गयी.

दाखिल होते ही फ्लॉप एक्टर का तमगा उनपर चस्पा हो गया. जिससे बहार निकलने के लिए उन्हें मणिरत्नम की फिल्म “युवा” का इंतज़ार करना पड़ा. मणिरत्नम की ‘युवा’ में उनके प्रदर्शन ने उनकी अभिनय क्षमता को साबित किया. युवा से पहले उन्होने कई फ्लॉप फ़िल्में दी और लोगों ने भी ये मानना शुरू कर दिया कि अभिषेक बच्चन चुके हुए कारतूस से ज्यादा कुछ नहीं. लेकिन युवा की कामयाबी ने उनका सारा दाग धो डाला. फिल्म में उनकी एक्टिंग को देखर यही लगा कि दरअसल उनमें प्रतिभा तो है लेकिन अब तक उन्होने फिल्मों का चुनाव करने में ही गलती की थी. बहरहाल युवा के बाद अभिषेक की गाड़ी चल पडी.

2005 में, उन्होंने चार लगातार हिट फिल्में ‘बंटी और बबली’, ‘सरकार’, ‘दस’ और ब्लाफ़मास्टर दीं. उसी साल, उन्होंने ‘धूम’ में अभिनय किया जो उनकी पहली बड़ी हिट थी. 2006 में उनकी पहली फिल्म ‘कभी अलविदा न कहना’ थी जो साल का सबसे ज्यादा कारोबार करने वाली फिल्म थी. 2007 में उनकी पहली फिल्म ‘गुरु’ थी जिसमें उनके प्रदर्शन की काफी सराहना हुई और यह उनकी पहली एकल हिट फिल्म साबित हुई.इसके बाद के सालों में आयी दोस्ताना ,झूम बराबर झूम.

बोल बच्चन और हालिया रिलीज फिल्म धूम-३ उनकी कामयाब फ़िल्में हैं. बंटी और बबली ,सरकार ,सरकार राज और पा ऐसी फ़िल्में थी जिसमे उन्हें पिता अमिताभ बच्चन के साथ जुगलबंदी का मौक़ा मिला और इस मौके को भुनाने में वो कामयाब भी रहे. अभिषेक की कामयाबी का पैमाना उनकी फ़िल्में एक हद तक ही हो सकती है क्यूंकि वो सामान्य पृष्ठभूमि वाले सामान्य अभिनेता नहीं हैं. महानायक के बेटे होने के नाते दर्शकों की उनसे काफी बड़ी उम्मीदें जुडी हुई है. अब तक तो अभिषेक इन उम्मीदों के आस-पास भी नज़र नहीं आते. अमिताभ बच्चन ने जिस तरह हिंदी सिनेमा को एक पूरे युग को अपनी अलग शैली सी अलग पहचान दी उनके प्रशंसक भी उनसे कुछ ऐसी ही रखते हैं. क्या अभिषेक इन उम्मीदों पर खड़े उत्तर पाएंगे ? ये तो वक़्त ही बताएगा.

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